सूत्रों के अनुसार जांच आयोग ने व्यवस्थाओं की कमियों के लिए एसडीएम व सीओ को दोषी माना है। यहां यह भी उजागर है कि सत्संग के अनुमति पत्र में भीड़ की संख्या को उजागर नहीं किया गया। एसडीएम सिकंदराराऊ ने यह अनुमति 18 जून 2024 को दी थी और इसमें कार्यक्रम में भाग लेने वाले व्यक्तियों की अनुमानित संख्या का कॉलम रिक्त छोड़ दिया गया।
सीओ ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया। सत्संग पंडाल की पूरी व्यवस्था सेवादारों के हाथ में थी। सत्संग में जुटी भीड़ के मुकाबले कम पुलिसकर्मी लगाना हादसे की वजह बनकर सामने आया है।
जांच आख्या को नजरअंदाज कर दी गई थी अनुमति
सत्संग के मुख्य आयोजक देव प्रकाश मधुकर ने 18 जून 2024 को उप जिलाधिकारी सिकंदराराऊ से मानव मंगल मिलन समागम कराने की अनुमति मांगी थी। इसमें 80 हजार लोगों की भीड़ एकत्रित होने की संभावना जताई थी। इस आधार पर एसडीएम ने सीओ और एसएचओ से जांच कर स्पष्ट आख्या मांगी थी। तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक सिकंदराराऊ आशीष कुमार सिंह ने 29 जून 2024 को रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में आसपास के जनपदों एवं अन्य क्षेत्र से लगभग करीब एक लाख भक्ताें एवं अनुयायियों के आने की संभावना है। एलआईयू ने यह संख्या दो लाख बताई थी। इसके बाद भी सत्संग में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को नजरअंदाज कर अनुमति दी गई।
इंस्पेक्टर ने मांगी थी एक प्लाटून पीएसी और 55 पुलिस कर्मी
कार्यक्रम में जुटने वाली भीड़ के अनुमान के आधार पर इंस्पेक्टर सिकंदराराऊ ने एक प्लाटून पीएसी और 69 पुलिस कर्मी मांगे थे। उच्चाधिकारियों ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी की रिपोर्ट को पूरी तरह नजर अंदाज किया। कार्यक्रम में एक एसएचओ, चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, दो महिला दरोगा, चार ट्रैफिक पुलिस कर्मी और डेढ़ सेक्शन पीएसी सहित कुल 69 पुलिस कर्मी लगाए गए थे।