तालाब से पकड़े मगममच्छ को देखते ग्रामीण
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हसायन कस्बा के मोहल्ला किला खेड़ा स्थित तालाब से 19 जून को एक मगरमच्छ पकड़ा गया। यह मगरमच्छ काफी समय से तालाब में रह रहा था, जिससे स्थानीय किसानों को परेशानी हो रही थी। वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से यह कार्रवाई की।
तालाब में मगरमच्छों के शरण स्थल बनने से किसान वर्ग के लोगों को खेती और मछली पालन में दिक्कत आ रही थी। वन विभाग ने पहले भी कई बार मगरमच्छ पकड़ने का प्रयास किया था, लेकिन जल की गहराई के कारण सफलता नहीं मिली। शुक्रवार को किसानों ने डीजल से चलने वाला ट्रॉली इंजन मंगवाया। इससे तालाब के पानी की निकासी की गई और जलकुंभी हटाई गई। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने मगरमच्छ की घेराबंदी की। काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को पकड़ा जा सका। मगरमच्छ के पकड़े जाने से काश्तकार किसानों ने राहत महसूस की। पकड़े गए मगरमच्छ को एटा क्षेत्र की हजारा नहर में छोड़ने के लिए वन कर्मी अपने साथ ले गए।
किसानों की परेशानी
राजा अवागढ़ की रियायत का हिस्सा रहे इस ऐतिहासिक तालाब में कई माह से मगरमच्छ आ गए थे। इससे किसानों को कमल ककड़ी, पानीफल सिंघाड़े और मछली पालन करने में परेशानी हो रही थी। किसान वर्ग के लोगों ने समय-समय पर वन चेतना केंद्र जाऊ नहर पर तैनात वन कर्मियों से मगरमच्छों को पकड़ने की मांग की थी। हालांकि, पहले कई बार मगरमच्छ पकड़ने में कामयाबी नहीं मिल पाई थी।
निगरानी और आगे की कार्रवाई
19 जून सुबह से ही तालाब में काम करने वाले मजदूरों और किसानों ने मगरमच्छ पर निगरानी रखी। जिसकी वन विभाग को सूचना दी गई। ग्रामीण काश्तकार किसानों की मदद से देर शाम को मगरमच्छ को पकड़ा गया। हसायन कस्बा के किला खेड़ा, छिपियान और आसपास के मोहल्लों के लोग मगरमच्छ पकड़ने की प्रक्रिया देखने के लिए इकट्ठे हुए। ऐतिहासिक झील में मौजूद अन्य मगरमच्छों पर भी नजर रखी जा रही है और उन्हें पकड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी।