अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम डॉ. एके विश्वेश के न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। दुष्कर्म में सहयोग करने वाली युवती को 20 साल एवं दुष्कर्म करने वाले दो अभियुक्तों को 25-25 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने तीनों पर 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी युवती रिंकी को तीन माह एवं दोनों आरोपियों को चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी 14 वर्षीय पीड़िता के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप था कि उसकी पुत्री दो जून 2015 को दोपहर करीब तीन बजे अपने घर पर थी। उसी समय आरोपी रिंकी उसके घर आई और उसकी पुत्री को पड़ोस में रहने वाले आरोपी अमरपाल के घर जरूरी काम का बहाना बनाकर बुला ले गई। जैसे ही उसकी पुत्री ने घर के अंदर प्रवेश किया। रिंकी ने दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद पहले से घर में मौजूद दोनों आरोपी अमरपाल एवं कपिल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर इस मामले में आईपीसी की धारा 354, 376 डी, 506, 120बी एवं 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
पुलिस द्वारा न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद आरोपियों ने मामले को झूठा बताते हुए सत्र परीक्षण कराए जाने की मांग की। वादी की ओर से एडीजीसी हरिओम शर्मा ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी रिंकी को 376 डी व 120बी में 20-20 साल की कैद एवं 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी है। आरोपी अमरपाल व कपिल को धारा 376 डी के तहत 25-25 साल की कैद एवं 30-30 हजार अर्थदंड, धारा 354 में पांच-पांच साल की कैद एवं पांच-पांच हजार अर्थदंड, धारा 354 ए में तीन-तीन साल की कैद एवं तीन-तीन हजार अर्थदंड, 506 में दो वर्ष की कैद एवं दो-दो हजार अर्थदंड, 3/4 पोक्सो एक्ट में 10-10 साल की कैद एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
---------