पति के हत्यारों को पकड़े न जाने से क्षुब्ध एक महिला, उसके बेटे व बहू ने जहर खाकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आत्महत्या करने की कोशिश की। आनन-फानन में तीनों को जबरन अस्पताल ले जाया गया। तत्काल इलाज मिल जाने के कारण इन तीनों की जान बच गई। महिला का कहना है कि उसके पति की हत्या जनवरी में कर दी गई थी।
उसके हत्यारे पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम घूम रहे हैं। शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब आरोपी उनकी जान भी लेने की फिराक में हैं। पुलिस ने आत्महत्या का प्रयास करने वाले तीनों लोगों के खिलाफ धारा 309 के तहत कोतवाली हाथरस गेट में मुकदमा दर्ज किया है।
चंदपा क्षेत्र के गांव खेड़ा परसौली के अतर सिंह की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर उनकी पत्नी शीला देवी, बेटे नीरज और पत्नी सत्यवती ने रविवार सुबह एसपी कार्यालय पर जहर खा लिया। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें सभी की आत्महत्या का जिम्मेदार चंदपा थानाध्यक्ष रमाकांत पचौरी को बताया।
कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे इन तीनों को जबरन गाड़ी में बैठा कर अस्पताल ले जाया गया। उपचार के बाद तीनों की हालत सामान्य हो गई। इसी साल 25 जनवरी को दोपहर खेड़ा परसौली निवासी अतर सिंह की बिसाना के तारागढ़ देवी मंदिर के पीछे गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उनका बड़ा बेटा संजीव भी घायल हुआ था।
इस दौरान सासनी में अतर सिंह के छोटे बेटे नीरज व ग्राम प्रधान पति सुनील पर हमला किया गया था। संजीव ने गांव के श्रीभगवान व लायक सिंह पुत्रगण रामवीर तथा मुकेश के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इधर सासनी की घटना में नीरज ने विष्णु व कालिया निवासीगण गांव खेड़ा परसौली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। सासनी पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। वहीं नौ महीने बीतने के बाद भी चंदपा पुलिस न तो चार्जशीट दाखिल कर सकी है और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है।
एसपी को लिखे सुसाइड नोट में अतर सिंह की पत्नी सत्यवती ने आरोप लगाते हुए कहा है कि हत्या के समय तत्कालीन थानाध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट लगाई थी, लेकिन इस मामले की जांच कर रहे अलीगढ़ के सीओ द्वितीय ने राजनीतिक दखल के कारण पुन: विवेचना के आदेश देकर विवेचना थानाध्यक्ष रमाकांत पचौरी को सौंप दी।
सत्यवती का कहना है कि उनके बेटे संजीव को फोन कर पहले ही केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने की बात बता दी गई थी। इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास है। इसके बाद से अतर सिंह के परिजन चंदपा पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं होने की बात कहकर अधिकारियों से गुहार लगाते रहे। जब कोर्ट के माध्यम से सत्यवती ने केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट पता की तो थानाध्यक्ष ने इस मामले में आरोपपत्र को निरस्त करने की मंशा जाहिर की।
दिवाली से पहले मार डालने की धमकी
सुसाइड नोट में सत्यवती ने लिखा कि एसओ के रवैये के कारण हत्या के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें दिवाली से पहले जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। आरोपियों की धमकी के कारण उन्होंने गांव छोड़ दिया है। आरोपियाें के हाथों मरने से अच्छा है कि वह न्याय की उम्मीद में एसपी कार्यालय के बाहर आत्महत्या कर लें, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसओ चंदपा की होगी।
- पुलिस पर दबाव बनाने के लिए अतर सिंह का परिवार इस तरह की हरकतें कर रहा है। यह हत्याकांड अभी विवेचना का बिंदु है। इस विवेचना का पर्यवेक्षण भी अलीगढ़ पुलिस कर रही है, इसलिए लोकल पुलिस पर सवाल उठाना सही नहीं है। अगर परिजनों को एसओ से कोई शिकायत है तो वह विधिवत रूप से अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत रखें। उस पर संज्ञान लिया जाएगा। इस तरह गैर कानूनी हरकतें करना सही नहीं है।
-अरविंद कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक हाथरस