तीन साल पहले झगड़े के दौरान लाठी के प्रहार से घायल महिला की गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय और विशेष न्यायाधीश एससीएसटी अत्याचार निवारण अधिनियम ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने इन तीनों को सश्रम आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति अभियुक्तों को 12-12 महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। जुर्माने की धनराशि का 70 फीसदी मृतका के पति को प्रतिकर के रूप में दिलाने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।
कोतवाली सिकंदराराऊ क्षेत्र के कस्बा पुरदिलनगर के मोहल्ला पथवारी गेट निवासी पप्पू पुत्र सोनपाल ने दो सितंबर 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप था कि उसकी पत्नी गुड़िया को पुरदिलनगर के मोहल्ला गड्ढा निवासी उमाशंकर, भुवनेश, केशव पुत्रगण राम सिंह कुशवाहा और किरन देवी पत्नी राम सिंह ने लाठी-डंडों से सिर पर प्रहार कर चोट पहुंचाई, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। मृतका गुड़िया अनुसूचित जाति से थी। पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच बहस भी हुई।
न्यायालय ने दोनों पक्षाें को सुनने के बाद अभियुक्त किरन देवी को दोषमुक्त कर दिया, जबकि उमाशंकर, केशव और भुवनेश को सश्रम आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्तों को 12-12 माह का अतिरिक्त साधारण करावास भी भुगतना होगा।