अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय राजेश्वरी टोलिया के न्यायालय ने हत्या के एक मामले में महिला सहित तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। तीनों को उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में तीनों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का निर्णय दिया है।
वादी महताब सिंह निवासी नगला पदम भाग ग्राम पंचायत कुरसंडा ने कोतवाली सादाबाद पुलिस को 18 नवंबर 2001 को तहरीर दी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका पुत्र अजीत सिंह रोजाना की भांति घर से खाना खाकर समय करीब 7.30 बजे रात्रि ट्यूबवेल पर सोने गया था। सुबह पांच बजे वादी का छोटा बेटा अभय सिंह रोजाना की भांति दौड़ करने के लिए गया था।
जब वह पानी लेने के लिए गांव के ही देवेंद्र सिंह के ट्यूबवेल पर गए। जहां ट्यूबवेल के दरवाजे के सामने अजीत सिंह को खून से लथपथ मृत अवस्था में देखकर तुरंत घर पर आया और बताया कि बड़े भाई अजीत सिंह की अज्ञात व्यक्तियों ने किसी धारदार अथियार से सिर, मुंह और हाथ पर चोट मारकर हत्या कर दी है। सूचना पर वह, परिवार व गांव के लोगों के साथ ट्यूबवेल पर पहुंचा तो वहां उसका पुत्र मृत अवस्था में पड़ा था।
पुलिस ने इस मामले की जांच की तो पाया कि हत्या अवैध संबंधों के चलते हुई थी। इसके बाद पुलिस ने साक्ष्यों सहित जुगेंद्र सिंह, पुष्पेंद्र सिंह एवं कांता के खिलाफ न्यायालय में साक्ष्यों सहित आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय में आरोपियों ने अपने जुर्म का इकबाल करने से इंकार कर दिया और सत्र परीक्षण की मांग की।
इस दौरान वादी की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी सुनील कांत शर्मा व निजी अधिवक्ता लक्ष्मीनारायण शर्मा द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का आरोपी पक्ष खंडन नहीं कर सका, जिससे न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए अपना निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि अर्थदंड की जमा धनराशि में से 40 हजार रुपये मृतक के विधिक उत्तराधिकारी को दिए जाएं।