कोतवाली हसायन के हत्या के मामले का खुलासा करते एएसपी राममूरत यादव।
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हाथरस। एक हफ्ते पहले 22 अप्रैल की रात हसायन के गांव अंडौली में हुई भट्ठे के ट्रैक्टर चालक इंद्रवीर की हत्या का खुलासा पुलिस ने कर दिया। भट्ठा मालिक श्यामू पर भट्ठा मजदूर राजेंद्र उर्फ राजू व उसके अन्य साथियों के साथ मिलकर इंद्रवीर की हत्या का आरोप लगा है। पुलिस का कहना है कि राजू की पत्नी से भट्ठा मालिक और इंद्रवीर के अवैध संबंध थे। रुपयों के लेनदेन में श्यामू का झगड़ा अपने भट्ठे के ट्रैक्टर चालक इंद्रवीर से था। इसलिए श्यामू ने इंद्रवीर से बदला लेने को हत्या की साजिश रची और राजू को मोहरा बनाते हुए उसके साथ मिलकर इंद्रवीर की हत्या कर दी।
एसपी कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान एएसपी राममूरत यादव ने बताया कि पूछताछ में राजेंद्र उर्फ राजू निवासी इटरनी, थाना हसायन ने बताया कि एक दिन पत्नी के मोबाइल पर गाने सुनने के दौरान उसने बातचीत की एक रिकॉर्डिंग सुनी। इससे पत्नी के इंद्रवीर और श्यामू से अवैध संबंधों का पता चला। इसके बाद भी वह शांत रहा। 22 अप्रैल की रात को भट्ठा मालिक श्यामू उसके पास आया और अपने साथ भट्ठे पर ले गया। यहां उसने अपने किए पर माफी मांगते हुए भविष्य में उसकी पत्नी को फोन न करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद राजू को खूब शराब पिलाई गई। श्यामू से इंद्रवीर ने 20 हजार रुपये लिए थे, जिन्हें वह लौटा नहीं रहा था। इस पर श्यामू ने उसका छह महीने का वेतन रोक रखा था। इसको लेकर उनके बीच एक दिन जमकर कहासुनी भी हुई थी। श्यामू ने राजू को इंद्रवीर से बदला लेने के लिए उकसाया। फिर श्यामू, उसके भाई रामू, राजू, मंगल, राकेश और नरेंद्र, इंद्रवीर के घर गए। उसे ट्रैक्टर में खराबी का बहाना बनाकर भट्ठे पर बुला लाए। फिर भट्ठे पर उसे जमकर शराब पिलाई गई। उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। राजू ने बताया कि उसने इंद्रवीर के पैर पकड़े। मंगल, नरेंद्र और राकेश ने हाथ पकड़े और रामू, श्यामू ने इंद्रवीर के अंगोछे से उसका गला दबा दिया। मालूम हो कि 23 अप्रैल की सुबह इंद्रवीर का शव भट्ठे के पास एक पेड़ पर लटका मिला था। पुलिस ने आरोपी राजेंद्र उर्फ राजू, राकेश, मंगल और नरेंद्र निवासी इंटरनी, थाना हसायन को गिरफ्तार कर लिया है।
एएसपी ने दो नामजदों को दी क्लीन चिट
पुलिस ने इंद्रवीर के परिजनों की शिकायत पर भट्ठा मालिक श्यामू पुत्र सतीश पाठक निवासी हसायन, उसके भाई रामू, ताऊ देवेंद्र पाठक और तहेरे भाई अंकुर पाठक को आरोपी बनाया था। पुलिस ने धारा 302 और एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। एएसपी राम मूरत यादव ने कहा कि हत्या में देवेंद्र पाठक और उनके बेटे अंकुर पाठक की कोई भूमिका नहीं है। केवल रामू, श्यामू के परिवार के सदस्य होने के कारण शिकायतकर्ता ने इनका नाम मुकदमे में दर्ज करा दिया था। जांच में दोनों की कोई भूमिका सामने नहीं आई। इसलिए उन्हें निर्दोष मानते हुए केस से उनके नाम निकालने का निर्णय लिया गया है।