कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला महारी (कचौरा) में शिक्षामित्र ने बुधवार की सुबह बंद कमरे में सीने में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक से चल रहे विवाद के चलते शिक्षामित्र ने यह कदम उठाया है। घटना का मुख्य कारण शिक्षामित्रों को नौकरी से बेदखल करना भी बताया जा रहा है। कोतवाल के अनुसार इत्तफाकिया मौत हुई है। इसके कारणों की गहनता से जांच की जा रही है।
बता दें कि गांव निवासी सत्यप्रकाश उर्फ सप्पू (36) पुत्र रक्षपाल सिंह शिक्षामित्र के पद पर हसायन के गांव नगला बरी के प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे। वह वहां प्रतिदिन पढ़ाने जाते थे। मृतक के भाई ओमप्रकाश ने बताया कि जब से शिक्षामित्रों का शिक्षक के रूप में समायोजन निरस्त किया गया, तब से वह लगातार तनाव में थे। इस वजह से मृतक का परिवार भी आर्थिक तंगी की चपेट में आ गया था। परिजनों के मुताबिक वह मंगलवार को स्कूल में पढ़ाने गए थे। आरोप है कि वहां उन्हें प्रधानाध्यापक ने उपस्थित पंजिका पर हस्ताक्षर नहीं करने दिए। तभी से वह तनाव में आ गए। रात को वह कमरे में ठीक-ठाक सोए थ। सुबह चार बजे जब परिवार के लोगों ने गोली चलने की आवाज सुनी तो उनके कमरे की तरफ दौड़े। देखा कि उनके सीने में गोली लगी थी। खून से लथपथ शव वहां बिछे तख्त पर पड़ा था। उनकी मौत की खबर फैलते ही मृतक के घर काफी भीड़ जमा हो गई। मृतक के चार बच्चे हैं। सूचना पर पुलिस गांव पहुंच गई और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। सूचना पर बीएसए रेखा सुमन हाथरस में पोस्टमार्टम हाउस पहुंची और पीड़ित परिवार के लोगों से बातचीत की।
मामला इत्तफकिया है। आत्महत्या का क्या कारण रहा, इसकी गहनता से जांच की जा रही है।
-प्रमोद कुमार द्विवेदी, कोतवाल सिकंदराराऊ
शिक्षामित्र सत्यप्रकाश को मंगलवार को रजिस्टर में साइन नहीं करने दिए गए, जिससे वह ज्यादा तनाव में आ गए। मृतक के परिवार को 20 लाख की आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए।
-महेश संघर्षी, प्रांतीय उपाध्यक्ष शिक्षामित्र संघ
मैं पोस्टमार्टम हाउस भी गई थी। परिजनों से बातचीत भी की थी। घटना बेहद दुखद है, लेकिन ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे यह पता चले कि प्रधानाध्यापक शिक्षामित्र को परेशान करते थे।
-रेखा सुमन, बीएसए हाथरस