हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम राजकुमार बंसल के न्यायालय में नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपहरण करने एवं दुष्कर्म करने के एक आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोषी को सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह भी निर्णय दिया है कि दोषी अर्थदंड अदा नहीं करता तो उसे चार माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली हाथरस जंक्शन में पीड़िता के पिता ने आरोप दर्ज कराया कि उसकी 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री 18 जुलाई, 2011 को घर से स्कूल जाने के लिए सुबह सात बजे निकली थी। इस दौरान दिलशाद उसे बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बिठाकर अपहरण कर ले गया। उसको बाइक पर ले जाते समय गांव के कुछ लोगों ने देखा भी था। जब उसकी पुत्री घर नहीं लौटी तो उसने उसके घर जाकर पता किया तो दिलशान गायब था। उसने जब दिलशान के परिजनों को घटना के बारे में बताया तो उन लोगों ने उससे गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना की जांच कर विवेचक ने आरोपी दिलशान के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय के समक्ष अभियुक्त ने आरोपों से इंकार किया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना और आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने धारा 363 में तीन वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड, धारा 366 में पांच वर्ष के कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये के अर्थदंड और धारा 376 में सात वर्ष के कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। धारा 506 में न्यायालय ने दोषी को दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी साहब सिंह चौहान ने की।