हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय राजेश्वरी टोलिया ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपहरण करने के मामले में छह लोगों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने सभी छह दोषियों को सात-सात साल के कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी है। न्यायालय ने व्यवस्था भी दी है कि अर्थदंड अदा नहीं करने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। न्यायालय ने दोषियों को धारा 323 में छह माह और 506 में एक-एक वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक महेशचंद्र वशिष्ठ के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हाथरस के न्यायालय ने 30 अप्रैल, 2003 को रिपोर्ट दर्ज कर विधिवत रूप से कार्रवाई के आदेश दिए थे, जिसमें कहा कि प्रार्थी एक गरीब व्यक्ति है। उसका एक दीवानी मुकदमा शीलारानी निवासी आल गांव जिला बंडारा महाराष्ट्र के साथ चल रहा है। मामला नजिहाई बाजार हाथरस स्थित एक मकान की किराएदारी से संबंधित है। वह अपने परिवार के साथ उस मकान में 70 वर्ष से किराए पर रह रहा है। शीलारानी से उसके देवर गोविंदराम ने गत वर्ष अपनी पत्नी राधा अग्रवाल के नाम इसका पट्टा करा लिया। तभी से वह उसके परिवार को लगातार मकान खाली करने के लिए अपहरण कराने की धमकी दे रहे थे। छह अप्रैल, 2003 को उसके परिजन मकान में रह रहे थे। उसी समय मुकेश उर्फ दीनदयाल, अरविंद कुमार उर्फ पप्पू पुत्रगण जगमोहनलाल निवासीगण चौबे वाली गली कोतवाली हाथरस, नेम सिंह उर्फ नेमा पुत्र लाल सिंह निवासी कुंवरपुर थाना चंदपा, प्रेम कुमार पुत्र महावीर निवासी किशोर टाकीज मुरसान गेट एवं लक्ष्मीनारायण और गोविंदराम पता नामालूम आए। यह लोग मारपीट करते हुए उनके परिवार के दो बच्चों विमल और गगन को ट्रैक्टर ट्रॉली में डालकर हत्या के इरादे से कुंवरपुर ले गए। कुंवरपुर से गगन ओर विमल गांव में अधिक भीड़-भाड़ होने के कारण किसी तरह इन लोगों के चंगुल से बचकर भागने में सफल रहे। दोनों घायल युवकों का बागला जिला अस्पताल में उपचार कराया गया। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने की।