कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रपर तीन साल पहले किए गए गर्भपात के दौरान महिला की आंतों को गंभीर चोट पहुंची थी। आगरा में डॉक्टरों ने महिला की जान बचाने को उसकी आंतों का बड़ा हिस्सा काट दिया था, लेकिन महिला की जिंदगी नहीं बचाई जा सकी थी। मामले के सुर्खियों में आने के बाद जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी। सीबीसीआईडी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद पूर्व एसीएमओ और गर्भपात करने की आरोपी नर्स समेत तीन लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है।
पांच फरवरी 2013 को कस्बे के मोहल्ला जाटवान निवासी रेखा पत्नी छोटेलाल के पेट में तेज दर्द होने पर वह जेठानी सुमन, डिंपी और पड़ोसन संजू देवी के साथ सीएचसी पर पहुंची। यहीं आरोपी स्टाफ नर्स सीमा ठाकुर ने रेखा को गर्भवती होने की जानकारी दी। तेज पेट दर्द होने पर जांच के बाद स्टाफ नर्स ने जल्द गर्भपात की जरूरत जताई। गर्भपात के दौरान रेखा की आंतों को काफी चोट पहुंची। उसकी आंते कई जगह से कट गईं। गर्भपात के कुछ देर बाद ही आंतें कटने से रेखा का पेट अचानक फूलने लगा।
रेखा की हालात खराब होने पर परिजन उसे पांच फरवरी की रात को एसएन मेडीकल कालेज आगरा में ले गए। यहां डॉक्टरों ने रेखा को बचाने की पूरी कोशिश की। रेखा को एक माह तक आईसीयू में रखा गया। रेखा ने उपचार के दौरान ही छह मार्च को दम तोड़ दिया। हालांकि विभागीय जांच में नर्स को क्लीन चिट भी दे दी गई।
मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय वर्मा ने इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग से की, जिसके बाद सरकार ने इस मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने का निर्णय लिया। सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर राजमणि राकेश के सेवानिवृत्त होने के बाद इंस्पेक्टर रनवीर सिंह को मामले की जांच सौंपी गई। इंस्पेक्टर रनवीर सिंह की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि तत्कालीन एसीएमओ डॉ. नन्नूमल ने विभागीय जांच में लापरवाही बरती। पीड़िता और उसके परिवार के किसी भी सदस्य का बयान नहीं लिया। हसायन एसओ प्रवीन कुमार का कहना है कि आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।