अलीगढ़। महानगर के न्यू राजेंद्र नगर बन्नादेवी इलाके की युवती की हत्या के 9 साल बाद उसके जीवित होने के साक्ष्य पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रकरण में साफ-साफ कहा है कि जब तक अदालत के समक्ष मां-बाप के सशपथ बयान न हों। तब तक नहीं माना जा सकता है कि यही युवती मृत बताई गई किरन देवी है। इसके लिए अदालत ने बन्नादेवी पुलिस को आदेश दिए हैं और 26 मार्च को साक्ष्य पेश करने को कहा है।
वाकये के अनुसार मूल रूप से बुलाकीगढ़ी गभाना निवासी पन्नालाल यहां न्यू राजेंद्र नगर बन्नादेवी में परिवार संग रहते हैं। उनकी विवाहित बेटी किरनदेवी अक्तूबर 2007 में अचानक गायब हो गई। इस मामले में पिता ने अपने रिश्ते के दामाद बंटी निवासी न्यू राजेंद्र नगर सहित चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया। इसी बीच नगला मेहताब इलाके में 2008 में एक अधजली लाश मिली। पन्नलाल ने उसकी शिनाख्त बेटी के रूप में की और बंटी, उसके भाई सोनू, चाचा विनोद व एक अन्य सुनील पर हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया। बाद में चारों आरोपियों को हत्या में जेल भेजा गया। कुछ दिन बाद एक आरोपी सुनील की एक्सीडेंट में मौत हो गई। अब मुकदमे का ट्रायल एडीजे-7 के न्यायालय में विचाराधीन है। इसी बीच पिछले माह अदालत में किरन देवी नाम की महिला अदालत पहुंची और उसने खुद को जिंदा बताते हुए कहा कि वही किरन देवी है, जिसकी हत्या का मुकदमा चल रहा है। यह भी बताया कि वह सौतेली मां के उत्पीड़न से तंग आकर चली गई और उसने सूसामई हसायन के महेश संग शादी कर ली। इस पर अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी। मामले में बन्नादेवी पुलिस ने इस बात की रिपोर्ट दे दी कि 12 साल से किरन देवी महेश संग शादी कर रह रही है।
अब अदालत ने जारी आदेश में कहा है कि बिना मां-बाप द्वारा शिनाख्त किए यह नहीं कहा जा सकता है कि यही वह किरन देवी है। इस संबंध में पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख नहीं किया है। अत: पुलिस मां-बाप के स्तर से शिनाख्त रिपोर्ट पेश की जाए और किरन देवी व उनके मां-बाप आदि परिजनों को भी 26 मार्च को कोर्ट में पेश किया जाए।