अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम राजकुमार बंसल के न्यायालय ने दहेज हत्या के एक मामले में पति व सास, ससुर को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने पति को नौ वर्ष एवं सास, ससुर को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई हैं। तीनों को 10-10 हजार के अर्थदंड की सजा भी सुनाई हैं। अर्थदंड अदा न करने पर तीन-तीन माह के अतिरिक्त कारावास भोगने का प्राविधान किया है।
वादी बदन सिंह निवासी नगला बुर्ज इकताजपुर थाना गोंड़ा जिला अलीगढ़ ने कोतवाली सादाबाद में रिपोर्ट दर्ज कराइ थी कि उसने अपनी बेटी प्रवेश उर्फ मौनी की शादी 7 मई, 2013 को तिलक सिंह उर्फ छीतरिया निवासी नगला कला नौगवां, सादाबाद के साथ पर्याप्त दहेज देकर की थी। प्रवेश की सास फूलवती, ससुर केरन सिंह व पति तिलक सिंह दहेज से असंतुष्ट थे।
शादी के बाद से ही वह पुत्री को और दहेज दिलाने के लिए परेशान करने लगे। इस पर एक भैंस व पचास हजार रुपये नगद भी दामाद को दिए। 1 सितंबर 2013 को उसकी लड़की का फिर फोन आया कि पिताजी मेरी ससुराल वाले पूरे पांच लाख रुपये दिए जाने की मांग कर रहे हैं। इन पैसों का प्रबंध कर दो वरना उसे यहां से ले जाओ।
दो सितंबर की सुबह फोन पर सूचना मिली कि ससुरालियों ने प्रवेश की हत्या कर दी है। वह जब अपने परिजनों के साथ नगला कली पहुंचा तो प्रवेश का शव घर के बाहर चबूतरे पर रखा था। जिसके मुंह व गर्दन पर चोट के निशान थे। उसके ससुराली जन घर का ताला बंद कर भाग गए थे।
न्यायालय ने इस मामले में 498ए, दहेज, प्रतिषेध अधिनियम, 304बी आईपीसी की सभी धाराआें में दोष सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई हैं। इस मामले में वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी एसएस चौहान ने की।
वहीं सादाबाद में अकोला आगरा निवासी मोहन पुत्र रनवीर ने थाने में अपनी बहन नीरज पत्नी रंजीत के ससुरालीजनों के विरुद्ध दहेज में कार की मांग को लेकर मारपीट करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
रिपोर्ट में रंजीत पुत्र राजवीर, ससुर राजवीर, सास गुड्डी, ननद सपना, लाखन निवासीगण एदलपुर को नामजद करते हुए कहा है कि शादी के बाद से ही मेरी बहन के ससुरालीजन अतिरिक्त दहेज में कार की मांग को लेकर बहन के साथ मारपीट करते रहते थे।
मेरा भाई धर्मवीर ग्राम एदलपुर आए और उनको समझाया तो उन्हाेंने हम दोनों व बहन के साथ भी मारपीट की जिससे बहन व हम दोनो भाई घायल हो गए।