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एटा पहुंची विवेचना, चुपचाप लगी चार्जशीट

Fri, 06 May 2016 11:17 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
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हाथरस। तीन साल पहले 27 मार्च 2013 को आगरा रोड स्थित आवास के बाहर हुए झगड़े में सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल के साले धर्मेंद्र अग्रवाल ने एक मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें गांव विधिपुर, हाथरस जंक्शन के नरेद्र उर्फ गोली पुत्र पन्नालाल व महमूदपुर जाटान, चंदपा के राजेश शर्मा पुत्र अश्वनी शर्मा को सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल के बेटे रजत अग्रवाल पर जानलेवा हमला करने और उसके साथ लूटपाट करने के आरोप में धारा 307, 392, 323 और 504 के तहत नामजद किया गया था। इसके अलावा दो आरोपी अज्ञात थे। 
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हाथरस पुलिस ने इस मामले में विवेचना के दौरान आरोपों को झूठा पाया और धारा 307 और 392 को हटा दिया। आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। बसपा नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय का आरोप है कि हाथरस पुलिस के आरोपों को झूठा बताए जाने के बाद सत्ता के इशारे पर इस केस की विवेचना एटा जिले में स्थानांतरित कर दी गई, ताकि इस मामले में रामवीर उपाध्याय या उनके किसी परिजन को फंसाया जा सके। इसकी जरा भी भनक किसी को नहीं लगने दी गई। विनोद उपाध्याय का कहना है कि 27 जून 2014 को जैथरा थाने के प्रभारी निरीक्षक ने इस मामले की दोबारा विवेचना शुरू की और कुछ समय पहले कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। कुल चार आरोपियों के अलावा पांचवें आरोपी के रूप में रामेश्वर उपाध्याय का नाम शामिल कर लिया गया, जबकि यह नाम केवल पहले से नामजद आरोपियों के बयान के आधार पर ही दाखिल किया जा सकता है, जबकि पहले से नामजद आरोपियों के कोर्ट में सरेंडर करने से उनके बयान दर्ज नहीं हो सके थे। विनोद उपाध्याय ने कहा कि एटा पुलिस ने जानबूझकर रामेश्वर उपाध्याय का नाम चार्जशीट में शामिल किया। कोर्ट से जारी समन को विरोधी पक्ष के लोगों ने पुलिस से दबा दिया। हाजिर नहीं होने पर गुरुवार को कोर्ट ने इस मामले में पहले दो नामजद आरोपियों के साथ ही हरिओम पुत्र रमेश चंद्र निवासी बाघऊ, हाथरस जंक्शन, ध्रुव शर्मा पुत्र राजनलाल शर्मा निवासी नगला मल्लू, मुरसान और रामेश्वर उपाध्याय की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।


अभद्रता के आरोपों की जांच होगी
हमने राजनीतिक दबाव में कोई कार्रवाई नहीं की है। सीजेएम कोर्ट ने पांच लोगाें के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किए थे। इन्हें 15 जून तक गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने हाजिर करना है। गिरफ्तारी के लिए दबिश दी गई थी। आरोपी अभी भी फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी को फिर दबिश दी जाएगी। जहां तक दबिश के दौरान अभद्रता करने के जो आरोप हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। मैं खुद इस मामले की जांच करूंगा। पूरे मामले की वीडियोग्राफी कराई गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष विनेाद उपाध्याय ने कहा है कि उनके पास भी दबिश की वीडियो मौजूद है। जांच में उनका सहयोग लिया जाएगा। आरोपी पुलिस कर्मियाें के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. अजयपाल शर्मा, एसपी


सत्ता के दबाव में पुलिस ने की कार्यवाही
सत्ता के दबाव में मेरे और भाइयों के आवासों पर पुलिस ने दबिश दी है। हम सभी कानून का सम्मान करने वाले लोग हैं। रामेश्वर कोई जघन्य अपराधी तो है नहीं। ऐसी दबिश तो किसी बड़े हिस्ट्रीशीटर और माफिया को दबोचने के लिए भी नहीं दी जाती। साफ है कि पुलिस पर सत्ता का दबाव है। साजिश के तहत कोर्ट से जारी समन दबा दिए गए, इसलिए इसका पता रामेश्वर उपाध्याय को नहीं चला, नहीं तो वह कब के कोर्ट में हाजिर हो गए होते। हाथरस की जनता सब जानती है। जनता मेरे साथ है। जनता विरोधियों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होने देगी।
- रामवीर उपाध्याय, पूर्व ऊर्जा मंत्री व विधायक सिकंदराराऊ

गिरफ्तारी नहीं हुई तो उच्चाधिकारियों से शिकायत
- पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का परिवार नौटंकीबाज है। अगर पुलिस प्रशासन चाहता तो रामेश्वर उपाध्याय समेत सभी अभियुक्त पहले ही रात को धर लिए जाते। पुलिस के कुछ लोगों ने वारंट की सूचना रामेश्वर को दे दी, जिससे रामेश्वर समेत सभी अभियुक्तों को भागने का पूरा मौका मिला। 2013 में रामेश्वर और उसके साथियों ने लूटपाट करने के बाद मेरे बेटे की हत्या करने की कोशिश की थी। पुलिस प्रशासन ने अगर इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की और रामेश्वर समेत सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो मैं पुलिस अधिकारियों की शिकायत ऊपर तक करूंगा। उपाध्याय परिवार अभियुक्तों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए पुलिस प्रशासन पर नाजायज दबाव बना रहा है। जिन लोगों ने कोतवाली में पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उपाध्याय परिवार से हाथरस का व्यापारी वर्ग काफी त्रस्त रहा है और इनकी धमकियों व चौथ वसूली से तंग आकर यहां से पलायन कर चुका है। उनकी मनमानी ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी।
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--देवेंद्र अग्रवाल, सपा विधायक सादाबाद
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