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दलित को जिंदा जलाने में एक को फांसी की सजा

Wed, 15 Feb 2017 11:33 PM IST
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस
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court shimla
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हाथरस। अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने 27 साल पुराने दलित उत्पीड़न और दलित को गोली मारकर जिंदा जलाने के मामले में एक अभियुक्त कुंवरपाल को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि 11 अन्य अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। इस हत्याकांड में पुलिस ने 37 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें 12 की मौत हो चुकी है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक 11 मार्च 1990 को वादी हरीशंकर पुत्र बलवंत सिंह जाटव निवासी ग्राम रुदायन थाना सासनी ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि उसके गांव में होली के त्योहार के उपलक्ष्य में सायं करीब चार बजे उदयवीर पुत्र चंद्रपाल अपनी जाति के सोनपाल के यहां गुलाल लगाने गया था। गुलाल लगाकर जब वह घर जा रहा था तो रास्ते में पंडित कुंवरपाल सिंह पुत्र भगवान सिंह के नौहरे से निकलकर कुंवरपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, नगेंद्र सिंह पुत्रगण भगवान सिंह, श्यामवीर सिंह, प्रेम सिंह, बनवारी और इंसाफी खां ने उदयवीर को पकड़ लिया। उसे मारापीटा।

उदयवीर किसी प्रकार इन लोगों से छूटकर मोहल्ले की तरफ भागा तो पीछे-पीछे उपरोक्त व्यक्तियों के साथ गांव के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। इन लोगों ने हाथों में मशाल लेकर दलितों के मोहल्ले में मकानों में आग लगा दी। जब लोग आग बुझाने के प्रयास करने लगे तो इन लोगों ने गोलियां बरसा दीं, जिससे लोग किसी प्रकार इन लोगों से जान बचाकर जंगलों की तरफ भाग गए।
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इस दौरान वादी के भाई दाताराम (52 वर्ष) को गोलियां मारकर इन लोगों ने आग में झोंक दिया, जिससे वह जिंदा जल गए। मामले में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने सीबीसीआईडी को जांच के लिए अधिकृत किया था, जिसने जांच के बाद इस बेहद गंभीर मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। न्यायालय ने लंबी सुनवाई के बाद आरोपी कुंवरपाल को मृत्युदंड की सजा सुनाई, जबकि जोगेंद्र, बाबू सिंह उर्फ बिजेंद्र को धारा 147, 148, 149, 302 आईपीसी और 3(2)(5) एससीएसटी एक्ट और अभियुक्त राजेंद्र, हरिओम, उमाशंकर, अनिल कुमार उर्फ भोला, मुकेश, अनिल उर्फ पप्पे, संतोष, दिनेश दर्जी और शंभू को धारा 147,148,435,149 3(2) (5) एससीएसटी एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए प्रत्येक को सश्रम आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

अर्थदंड अदा नहीं करने पर प्रत्येक को दो-दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा भी भुगतनी होगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सीबीसीआईडी के एसपीओ छविरंजन द्विवेदी, डीजीसी वतन सिंह, एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय, एडीजीसी सुनीलकांत शर्मा आदि ने पैरवी की।
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