हाथरस। सादाबाद से सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल के बेटे रजत अग्रवाल पर जानलेवा हमले के आरोप में फरार पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई तथा जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। कोर्ट ने सरकारी वकील को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले इनके खिलाफ किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं करने की भी हिदायत दी है।
तीन साल पहले 27 मार्च 2013 को होली के दिन रजत अग्रवाल पर जानलेवा हमला हुआ था। सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल के साले धर्मेंद्र अग्रवाल ने कोतवाली में इसके लिए कई लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज करवाया था। एफआईआर में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई एवं जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय का नाम नहीं था। यहां तक कि कोतवाली पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद आरोपियों पर लगाई गई जानलेवा हमले और लूट आदि की धाराएं भी हटा दी थीं। इसके बाद विवेचना एटा ट्रंासफर हो गई। लेकिन वहां की पुलिस ने जो चार्जशीट लगाई, उसमें सभी आरोप न सिर्फ बरकरार रखे, रामेश्वर समेत तीन लोगों के नाम भी चार्जशीट में शामिल कर लिए।
इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने रामेश्वर समेत सभी पंाच आरोपियों के खिलाफ सम्मन जारी किए। हाल में सीजेएम कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। बताते हैं कि इसका पता छह मई को रामेश्वर के परिजनों को तब चला, जब कई थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी उनके घर गिरफ्तारी के लिए पहुंची। इसे लेेकर जमकर हंगामा हुआ। उसके बाद से रामेश्वर उपाध्याय फरार चल रहे हैं। हाईकोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते की राहत दे दी है। इससे पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं।