थाना हाथरस गेट पुलिस ने गजब कारनामा किया। छह साल पुराने एक मामले में इस थाने की पुलिस ने एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग नामों से आरोपी बना दिया। इतना ही नहीं, विवेचक ने एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग नामों से बयान भी जीडी में दर्ज कर लिए। अब उससे फिर से यह कहा जा रहा है कि वह दूसरे नाम से भी अपनी जमानत करा ले, जबकि वह अपने असली नाम से पहले ही जमानत करा चुका है। विवेचक की तैनाती इस समय एटा में है। इस मामले के पकड़ में आने के बाद कोर्ट ने विवेचक को तलब किया है और एटा के एसएसपी को पत्र भी लिखा है।
हुआ यूं कि तीन नवंबर 2012 को थाना हाथरस गेट में तैनात तत्कालीन दरोगा सुखदेव सिंह पुलिस दल के साथ जब गश्त पर थे तो एक मामले में वह गांव दयानतपुर के निकट पूछताछ के लिए गए तो उसी समय उनके साथ पुलिस दल की तड़का-भड़की कुछ ग्रामीणों से हो गई। ग्रामीणों से पुलिस की नोक-झोंक हुई और खासा हंगामा खड़ा हो गया। आरोप है कि वहां ग्रामीणों ने पुलिस दल पर हमला कर दिया। इसमें दरोगा और एक कांस्टेबल को चोटें आईं। लोगों ने जाम भी लगाया।
पुलिस ने उस समय इस मामले की रिपोर्ट हितेंद्र पुत्र हरप्रसाद, ग्यासीराम पुत्र किशनलाल और असलम खां पुत्र हजारी निवासीगण दयानतपुर के अलावा 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कर ली। इसमें पुलिस दल पर पथराव करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब इस मामले में विवेचना की तो इन तीनों के अलावा कृष्णगोपाल, रूपकिशोर, ऊदल सिंह, वेदराम माहौर, गणेशीलाल, शिवचरण माहौर, विवेक रावत, रामनिवास उर्फ फोकटी, मुकेश रावत, राखी , लटूरी माहौर निवासीगण गांव दयानतपुर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
पुलिस ने जिस शिवचरन सिंह माहौर पुत्र सरमन सिंह का नाम आरोप पत्र में शामिल किया है, असल में उस नाम का कोई व्यक्ति गांव दयानतपुर में है ही नहीं। इस मामले की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष हाथरस गेट एमएस भाटी ने की। पुलिस ने दूसरा नाम लटूरी माहौर पुत्र सरमन सिंह चार्जशीट में दाखिल किया। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना पेट पालन करता है। वास्तविकता यह है कि शिवचरण को ही गांव में लटूरी कहा जाता है। लेकिन पुलिस ने उसे अपनी चार्जशीट में दो स्थानों पर आरोपी बना दिया।
बात यहीं तक नहीं रुकी। पुलिस ने अपने रोजनामचे यानी जीडी में भी उसके फर्जी तरीके से केस को मजबूत बनाने के लिए शिवचरन के अलग और लटूरी के अलग से बयान भी दर्ज कर लिए। इस मामले में अन्य ग्रामीणों के साथ शिवचरन उर्फ लटूरी ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर अपनी जमानत करा ली। इधर, पुलिस ने जब चार्जशीट लगा दी तो उसमें लटूरी माहौर पुत्र सरमन सिंह का भी नाम है। ऐसे में उसके नाम से गैर जमानती वारंट जारी हो गए। विवेचक भी पूरे मामले में फंस गए। अब स्थिति यह है कि कुछ पुलिस कर्मिर्यों द्वारा शिवचरन उर्फ लटूरी पर यह दवाब बनाया जा रहा है कि पहले उसने शिवचरन के नाम से जमानत कराई और अब वह लटूरी के नाम से कोर्ट में हाजिर हो जाए।
इस मामले में गांव के कुछ लोगों ने उसकी मदद की। मामले को लेकर न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। ग्राम प्रधान ने भी यह लिखकर दिया कि शिवचरन उर्फ लटूरी नाम का एक ही व्यक्ति है। यह मामला संज्ञान में आने पर कोर्ट ने पुलिस ने आख्या तलब की और विवेचक को तलब किया। पुलिस ने उससे यह जानना चाहा है कि वह कोर्ट में हाजिर होकर यह बताए कि शिवचरन उर्फ लटूरी को अलग-अलग अभियुक्त बनाकर किस परिस्थितियों में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। विवेचक की तैनाती एटा में है। कोर्ट ने एटा एसएसपी को भी इस बारे में पत्र भेजा है।