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सिपाही के शव को लेकर भटकता रहा भाई

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अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
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सदर और चंदपा कोतवाली में तैनात रहे सिपाही कैलाश सिंह सेंगर की मौत के मामले में पुलिस विभाग के ही अधिकारियों की संवदेनहीनता को लेकर परिजनों में खासा रोष व्याप्त है। सिपाही की मौत के बाद पुलिस का कोई थी अधिकारी परिजनों को ढांढस बंधाने नहीं आया।

यही नहीं, कई घंटे बाद कैलाश के शव को उनके घर फतेहपुर ले जाने के लिए पुलिस लाइन से जो वाहन उपलब्ध कराया गया, वह बेहद खटारा था और इटावा में खराब हो गया। इसके बाद सिपाही के परिजन शव को लेकर कई घंटे तक परेशान रहे और इधर-उधर भटकते रहे।
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कैलाश सिंह सेंगर की बुधवार सुबह उस समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी, जब वह घर से सुबह टहलने निकले थे। हाथरस में काफी समय तक तैनात रहने के कारण उनका परिवार आवास विकास कॉलोनी के एक घर में रह रहा था। एक हफ्ते पहले ही उनका तबादला एटा के लिए किया गया था। महज 46 साल की उम्र में कैलाश की मौत से परिजनों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।

जिला अस्पताल में रोते-बिलखते परिजनों के आंसू पोंछने के लिए पुलिस का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। परिजनों की आंखें अधिकारियों के आने का इंतजार करती रहीं। हालांकि सदर कोतवाली पुलिस परिजनों के साथ बनी रही और उनके हर दुख को हरसंभव मदद कर बांटने की कोशिश करती नजर आई।

हैरत की बात यह रही कि कैलाश के शव को उनके घर तक ले जाने के लिए वाहन मुहैया कराने में पुलिस लाइन ने बहुत देर लगा दी। संवेदनहीनता की हदें पार करते हुए ऐसा वाहन उपलब्ध कराया गया, जो खटारा था। जरा भी नहीं सोचा कि अगर वाहन रास्ते में खराब हो जाएगा तो दुख में डूबे परिजन शव को लेकर कहां भटकेंगे। कैलाश सिंह सेंगर के भाई राजू ने फोन पर बताया कि उसे हाथरस पुलिस के अधिकारियों से ऐसी संवेदनहीनता की उम्मीद नहीं थी।

राजू के मुताबिक इटावा के जसवंतनगर पहुंचते ही खटारा वाहन जवाब दे गया। उस समय घड़ी में शाम के पौने आठ बजे थे। परिजनों ने फिर हाथरस के आरआई से फोन पर बात की। आरआई के हाथ खड़े करने पर परिजनों ने एसपी घुले सुशील से बात की।
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एसपी ने इटावा के एसएसपी से बात कर परिजनों को वाहन दिलाया। पूरी कवायद में साढ़े तीन घंटे बीत गए और इस बीच परिजन कैलाश के शव को लेकर जसवंतनगर में आंसू बहाते रहे। इस देरी के कारण कैलाश का शव बुधवार रात नहीं पहुंचकर गुरुवार सुबह फतेहपुर के अपने गांव खेमकरनपुर पहुंचा और तब कहीं जाकर गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार हो सका।
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