न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
कोरोना महामारी के दौर में पंचायत चुनाव की मतगणना जैसे भीड़ वाले आयोजन को लेकर लोग चिंतित हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल में बार-बार भीड़ जमा करने की लापरवाही का खामियाजा कई लोगों की मौत के रूप में सामने आ रहा है, लेकिन लगता है इससे सबक नहीं लिया गया है। तभी तो पंचायत चुनाव की मतगणना की इजाजत दे दी गई है। एक तरफ तो आम जनता को घर से अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है तो दूसरी तरफ मतगणना में भीड़ इकट्ठी होने की अनुमति दी जा रही है।
कुंभ जैसा महापर्व कोरोना की वजह से मध्य में ही स्थगित कर दिया गया। अब भीड़ का रेला पंचायत चुनाव की मतगणना में लगेगा। इसे कम से कम 15 दिन के लिए उस समय तक टाला जा सकता था, जब तक कोरोना की संक्रमण दर कम नहीं हो जाती।
-विपिन वार्ष्णेय, व्यापारी नेता
यह सही है कि चुनाव लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन मतगणना में भीड़ इकट्ठी होगी। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए इसका कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ना जनहित में होता।
-नरेंद्र सिंह चौहान, किसान नेता
जब खतरा सामने हो तो उसका मुकाबला करने की सोची जाती है, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। मतगणना यदि कुछ दिन बाद होती तो क्या फर्क पड़ रहा था। आपदा के समय सोच विचार दुरुस्त होना चाहिए।
-इकराम कुरैशी, शिक्षक
यदि मतगणना बाद में होती तो कम से कम मतगणना स्थल पर जुटने वाली भीड़ की समस्या न आती। आखिर ऐसे चुनाव परिणाम क्या जरूरी हैं, जो लोगों की जान पर भारी पड़ जाएं।
-अभिषेक वार्ष्णेय, सभासद