जन अधिकार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने एनआरएचएम घोटाला नहीं किया था। बसपा नेताओं ने साजिश के तहत उन्हें फंसाया था। एनआरएचएम घोटाले से पहले दो डॉक्टरों की हत्या हुई थी।
उन्होंने हत्या का पर्दाफाश कराए जाने के लिए आवाज उठाई तो साजिश के तहत उन पर एनआरएचएम घोटाला थोप दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एनआरएचएम से उनका कोई लेना-देना नहीं था और कभी इस विभाग की फाइल पर हस्ताक्षर भी नहीं किए। यह बातें उन्होंने जनसंपर्क चेतना यात्रा के हाथरस आगमन के बाद राजरानी मेहरा गेस्ट हाउस में सभा के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि बसपा में उनका कद बढ़ रहा था और कुशवाहा, सैनी, शाक्य, दलित और शोषितों में पहचान बन रही थी। इस सब से बसपा के कुछ नेता जल रहे थे। मेरे साथ धोखा हुआ, जिसकी वजह से मैं चार साल जेल में रहा। उन्होंने कहा कि पहले बसपा में जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी नारा था और उसी से प्रेरित होकर बसपा में शामिल हुए थे।
अब बसपा में जिसकी जितनी थैली भारी, उसकी उतनी भागीदारी चल रही है। उन्होंने अभी हाल में बसपा छोड़ने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को जन अधिकार मंच में आने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि वह यदि मंच में शामिल होते हैं तो उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर उनके पीछेे-पीछे चलेंगे। अयोध्या में राम मंदिर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि कुछ लोग भगवान का घर बनाने के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
युवा रोजगार के लिए देश-प्रदेश छोड़ रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिल रहा है। मनरेगा को खेती से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आरक्षण पर बोलते हुए कहा कि आरक्षण किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। देश में जो जाति, जितने फीसदी है, उसे उतने फीसदी ही आरक्षण मिलना चाहिए। आरक्षण का लाभ चालाक लोग उठा रहे हैं।
जब वह जेल में थे तो दलित, शोषित, पिछड़ों के लिए ही सोचते रहते थे। वहीं पर जन अधिकार मंच बनाने की योजना बनाई गई। मंच के बैनर तले सभी वर्गों का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने वोट की ताकत समझनी होगी। हमारे वोट से ही देश और प्रदेश में राजा बनते हैं।
अब तक 72 जनपदों में जनसंपर्क हो चुका है और 577 स्थानों पर लोगों से मिले हैं। इससे पूर्व मंच के कार्यकर्ताओं ने बाबू सिंह कुशवाहा का माल्यार्पण, तलवार और प्रतीक चिन्ह भेंटकर जोशीला स्वागत किया।