नगर पंचायत कार्यालय में बुधवार को अधिशासी अधिकारी और लिपिकों के बीच जमकर वाद-विवाद हुआ, जिससे वहां अच्छा-खासा हंगामा खड़ा हो गया। लोगों की शिकायत पर ईओ ने जब लिपिकों को डांटना शुरू किया तो लिपिक भी ईओ पर हावी हो गए। आक्रोशित लिपिकों ने अपने दफ्तरों पर ताले जड़ दिए और डीएम के पास जाने की कहने लगे। ईओ ने इस पूरे घटनाक्रम से डीएम को अवगत करा दिया है।
बुधवार की दोपहर को ईदगाह कॉलोनी के एक व्यक्ति ने नगर पंचायत कार्यालय आकर अधिशासी अधिकारी दीपिका शुक्ला को बताया कि उन्होंने एक माह पहले हैंडपंप खराब होने की शिकायत की थी, लेकिन अभी तक नल ठीक नहीं कराए गए हैं। उसी समय खिलौना वाला मोहल्ला के समीप स्थित नई बस्ती निवासी एक व्यक्ति आया। उसका कहना था कि उनके पिताजी की मृत्यु हो चुकी है। वह मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाले के लिए कई दिनों से नगर पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
लगातार दो शिकायतें आने के बाद ईओ का पारा चढ़ गया। उन्होंने नगर पंचायत कार्यालय में मौजूद लिपिकों को बुलाया। उन्होंने पहले एक लिपिक से शिकायतों के निस्तारण के संबंध में जानकारी मांगी तो लिपिक ने बताया कि वह ठेकेदार से हैंडपंप ठीक कराने की कह चुके हैं। एक-दो दिन में हैंडपंप ठीक हो जाएंगे। ईओ ने इन लिपिक कहा कि वह आए-दिन काम से संबधित बिल पास कराते रहते हैं। वह बिना जांच किए हुए आगे से कोई भी बिल पास नहीं करेंगी। इस बात पर ईओ और कर्मियों में नोक-झोंक होने लगी। तभी एक लिपिक ने आरोप लगाया कि कॉलोनी के नक्शे को पास कराने के नाम पर मोटी रकम की डील की जा चुकी है। लिपिक इतने आवेश में आ गए कि उन्हाेंने अपने-अपने कार्यालयों में ताले लगा दिए और कर्मचारियों को एकत्रित कर डीएम के पास चलने की कहने लगे। इसके बाद कर्मचारी एकत्रित होकर ऑफिस से बाहर चले गए।
नोक-झोंक के दौरान एक लिपिक कहने लगे कि वह उनकी अनुपस्थिति में काम करते हैं। जब भी आदेश होता है, रात-दिन काम में लग जाते हैं। नगर पंचायत में हंगामे की सूचना पाकर भाजपा नेता और कई पूर्व सभासद और त्यागी कॉलोनी के निवासीगण भी नगर पंचायत कार्यालय आ गए। भाजपा नेताओं ने ईओ से इस पूरे मामले की जानकारी ली। उन्हें आश्वस्त किया कि वह निडर होकर सही काम करें। वह उनके साथ हैं। त्यागी कॉलोनी के निवासियों ने कहा कि उनकी कॉलोनी का नक्शा जानबूझकर पिछले 10 वर्षों से पास नहीं किया जा रहा है। कार्यालय के लिपिकों द्वारा ईओ पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वह निराधार हैं। कार्यालय से कर्मचारियों के जाने के बाद ईओ दीपिका शुक्ला ने फोन पर डीएम और एडीएम को पूरी घटना से अवगत कराया।