सोसायटी के सदस्यों का कहना है कि जब वीआईपी कॉलोनी की हालत यह है, तो बाकी शहर की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। यहां के लोगों में यह भी रोष है कि बीते आठ वर्षों से वह नगर पालिका को नियमित रूप से गृह और जलकर दे रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें केवल उपेक्षा ही मिल रही है।
काॅलोनी सोसायटी उठा रही जिम्मेदारी
काॅलोनी निवासी नगर पालिका को जल व गृहकर देते हैं, लेकिन सुविधाएं न मिलने के कारण सोसायटी ने कुछ जिम्मेदारियां ले रखीं हैं। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, पेड़ों की छंटाई, कटाई, स्ट्रीट लाइट, सीवर लाइन, पार्क की देखभाल शामिल हैं। इसके लिए प्रति घर 300 से 500 रुपये की प्रतिमाह शुल्क लिया जाता है।
नहीं मिल रहा अमृत योजना का पानी
वसुंधरा एन्क्लेव में अमृत योजना के तहत पेयजल की पाइपलाइन डाली जा चुकी है। कुछ घरों में कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, लेकिन इन पाइपों में पानी नहीं आता। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कभी-कभी पानी की बहुत दिक्कत होती है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि काॅलोनी के निर्माण के दौरान सरकारी महकमों ने भी ध्यान नहीं दिया। विनियमित क्षेत्र से काॅलोनी का जो नक्शा पास किया गया है, उसके अनुरूप बसावट नहीं है। अगर नक्शे के अनुरूप काम होता तो स्थिति बेहतर हो सकती थी।
समस्याएं
- कुत्ते और बंदर पूरे क्षेत्र में फैलाते हैं कूड़ा
- रोजाना जगह-जगह जलाया जाता है कूड़ा
- मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा
- प्लॉट बने कूड़ा घर, पार्कों में भरा सीवर का पान
- नगर पालिका आठ वर्षों से कर रही गृह व जलकर वसूली