सहपऊ के प्राथमिक विद्यालय खोंड़ा द्वितीय में पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते विद्यार्थी
- फोटो : संवाद
जिले में परिषदीय स्कूलों पर एक नजर
- कुल विद्यालयों की संख्या - 1235
- कुल शिक्षकों की संख्या - 4000
- शिक्षामित्रों की संख्या - 1350
- अनुदेशकों की संख्या - 250
- कुल विद्यार्थियों की संख्या - 1 लाख 10 हजार करीब
- जिले में जर्जर स्कूली भवन-- 112
जर्जर कक्षाें में चल रहीं कक्षाएं
सुबह 9.30 बजे संविलियन विद्यालय रामपुर में कक्षा एक से लेकर आठ तक कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। यहां के कमरों का प्लास्टर उखड़ रहा है। कक्षा बरामदे में संचालित की जा रही हैं। इस विद्यालय में 150 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें से बृहस्पतिवार को 105 विद्यार्थी उपस्थित थे। बच्चों ने बताया कि बारिश के दिनों में अक्सर प्लास्टर गिर जाता है। बिजली नहीं आती है, इस कारण गर्मी से बच्चे परेशान दिखे।
पेड़ के नीचे चल रहा प्राथमिक विद्यालय खोंड़ा द्वितीय
सुबह 10.05 बजे टीम जब ब्लॉक सहपऊ क्षेत्र के गांव खोंड़ा पहुंची तो यहां प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में कक्षाओं का संचालन पेड़ की नीचे होता मिला। बच्चों ने बताया कि सुबह 10 बजे तक बिजली नहीं आती है। विद्यालय में एक कमरा है और एक बरामदा है। इस कमरे में प्रधानाध्यापक का कार्यालय है और इसमें ही कक्षा पांच की कक्षा को संचालित किया जाता है। बच्चों ने बताया कि बारिश के दिनों में पढ़ाई पूरी तरह से बाधित रहती है। सभी बच्चे बरामदे में बैठते हैं। इस विद्यालय में 37 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
मीरपुर के सचिवालय में चल रहीं कक्षाएं
सुबह 11 बजे बिसावर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीरपुर पहुंचे तो यहां का भवन पूरी तरह से जर्जर था। पंचायत सचिवालय के एक हॉल में पिछले तीन वर्षों से स्कूल की छह, सात व आठ की कक्षाएं चल रही हैं। विद्यालय में मीरपुर के अलावा समीपवर्ती गांव बिचपुरी, लोकेरा और मोनिया से भी छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। बारिश शुरू होते ही सचिवालय तक जाने वाले करीब 100 मीटर लंबे कच्चे रास्ते पर कीचड़ जमा हो गया है।
सादाबाद के स्कूल में 10 कमरों में पढ़ रहे 606 छात्र
सादाबाद नगर क्षेत्र के संविलियन विद्यालय द्वितीय में वर्तमान में करीब 606 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि उनके बैठने के लिए केवल 10 कक्ष उपलब्ध हैं। कमरों की कमी के कारण कई कक्षाएं बरामदे में संचालित करनी पड़ रही हैं। प्रधानाध्यापक जितेंद्र सिंह का कहना है कि मौजूदा छात्र संख्या के अनुसार कम से कम चार अतिरिक्त कक्षों की तत्काल आवश्यकता है। कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। कमरों के अभाव में चाहकर भी अधिक संख्या में नए प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं।