हादसे के बाद सवाल उठ रहा था कि क्या प्रशासन उन डग्गामार और परमिटधारी वाहनों की मनमानी पर अंकुश लगा पाएगा, जोकि उसकी नाक के नीचे क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे हैं और सवारियों की जान को खतरे में डाल रहे हैं, लेकिन हादसे के दो दिन बाद भी पुलिस-प्रशासन इस पर अंकुश नहीं लगा पाया है।
मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथरस जंक्शन के गांव जैतपुर के निकट हुई दुर्घटना में आठ लोगों की मौत के बाद भी न तो पुलिस-प्रशासन की नींद टूटी है और न डग्गामार वाहनों की मनमानी पर अंकुश लगा है। 12 दिसंबर को भी मथुरा-बरेली राजमार्ग के साथ जिले के अन्य छोटे मार्गों पर मैजिक, टेंपो और अन्य वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां सफर करती नजर आईं।
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हादसे के बाद सवाल उठ रहा था कि क्या प्रशासन उन डग्गामार और परमिटधारी वाहनों की मनमानी पर अंकुश लगा पाएगा, जोकि उसकी नाक के नीचे क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे हैं और सवारियों की जान को खतरे में डाल रहे हैं, लेकिन हादसे के दो दिन बाद भी पुलिस-प्रशासन इस पर अंकुश नहीं लगा पाया है। अब भी न केवल यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां ढोई जा रही हैं, बल्कि माल वाहक वाहन भी सवारियां लेकर दौड़ रहे हैं।
12 दिसंबर को जब स्थिति का जायजा लिया गया तो सिकंदराराऊ सहित कई मार्गाें पर जिन वाहनों में आठ सवारियों की स्वीकृति है, उनमें 15 से 18 तक सवारियां बैठी नजर आईं। हालात यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के यात्री घर पहुंचने की जल्दबाजी और कम किराये की खातिर इन वाहनों में खतरे का सफर करने से बिल्कुल नहीं झिझक रहे हैं और न हीं प्रशासन इन वाहन चालकों की मनमानी रोक पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में सामूहिक रूप से लोगों को माल वाहक वाहनों में बैठाकर इधर से उधर ले जाया जा रहा है।
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181 वाहनों के चालान, चार को किया सीज
यातायात पुलिस की ओर से 12 दिसंबर को यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 181 वाहनों के चालान काटे गए हैं। इसमें बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर 138, ओवरलोडिंग में 16, यातायात नियमों का उल्लंघन करने में 14, बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाने पर सात और बिना बीमा के वाहन चलाने पर दो वाहनों के चालान किए किए गए। चार वाहनों को सीज किया गया।
लगातार सड़क पर चेकिंग की जा रही है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं। ओवरलोड वाहनों पर भी कार्रवाई की जा रही है।-अशोक कुमार, एएसपी हाथरस।