न पानी, न शौचालय की सुविधा
हैरानी की बात यह है कि एक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद यहां पीने के पानी और शौचालय जैसी अनिवार्य सुविधाओं का अभाव है। केंद्र पर प्रतिदिन 20 से 25 महिलाएं उपचार के लिए आती हैं, जिन्हें पानी के लिए अपने घर से बोतलें साथ लानी पड़ती हैं। शौचालय की सुविधा न होना उनके लिए सबसे बड़ी समस्या है।
एक सीएचओ से चल रहा केंद्र
स्वास्थ्य विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है, इसलिए एएनएम को ही छह-छह माह का प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें सीएचओ बना दिया गया है। यहां एकमात्र सीएचओ अंजली दीक्षित तैनात हैं। वह ही केंद्र खोलती व बंद करती हैं। परामर्श व दवाएं देने का काम भी इन्हीं का है। इस कारण भी मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ता है।