शीतगृह से आलू निकालते समय पल्लेदार दुर्गेश, विजय कुमार, सौरभ एवं सोनू की हालत बिगड़ गई। ये उल्टियां करने लगे। चैंबर से बाहर आकर अचेत हो गए। मौके पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्राथमिक उपचार दिया। हालत में सुधार होने पर यह घर चले गए।
दुर्गेश ने बताया कि आलू निकलते समय उसकी हालत बिगड़ गई, साथी उन्हें बाहर लेकर आए। उल्टी करते-करते बुरा हाल हो गया। इन्होंने बताया कि चैंबरों में इतना धुआं है कि घुटन हो रही है और ठीक से सांस नहीं ली जा रही है। वहां रखे आलू के कट्टे भीग गए हैं। आंखों में जलन हो रही है। पानी से निकलते समय पैरों में जलन महसूस हुई।
शीतगृह में आग में मिर्च-मसाले, गुड़, धनियां, सौंफ, किशमिश, छुआरे, बादाम, अखरोट आदि सामान जलकर राख हो गया। आग में जले मलबे को शुक्रवार को शीतगृह के पीछे की तरफ खेत में फेंक दिया गया। इसमें किराने का सामान भी था।
कम नहीं हुई मिर्च-मसाले जलने की गंध
शीतगृह में रखे मिर्च-मसाले जलने की गंध शुक्रवार को भी कम नहीं हुई। शीतगृह में बचाव कार्य में जुटे लोग और किसान मुंह पर कपड़ा बांधे हुए थे। आंखों में जल और सांस लेने में परेशानी बनी रही।