आरोप है कि सपा सांसद ने सच्चे राष्ट्रभक्त, हिंदुत्व के पुरोधा, वीर शिरोमणि, सनातन धर्म के संरक्षक राणा सांगा का अपमान एवं उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल कर उन्हें व उनके समस्त समाज को इरादतन अपमानित एवं बेइज्जत किया है, जो अपराध है।
महाराणा सांगा पर विवादित टिप्पणी कर घिरे सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के खिलाफ दाखिल प्रार्थना पत्र पर एमपी/एमएलए कोर्ट में 10 अप्रैल को फिर सुनवाई हुई। न्यायालय ने इस मामले में क्षेत्राधिकारी को प्रारंभिक जांच करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा है कि जब तक विपक्षी के विरुद्ध संज्ञान न लिया जाए या उसे विचारण के लिए तलब न किया जाए तो विपक्षी को ऐसे मामले में किसी भी प्रकार से अपनी प्रतिरक्षा का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तिथि नियत की है।
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थाना हाथरस गेट क्षेत्र के गांव हतीसा निवासी मतेंद्र सिंह गहलोत ने एमपी/एमएलए कोर्ट दीपकनाथ सरस्वती के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था, जिसमें आरोप है कि सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने राज्यसभा में जानबूझकर उनके और उनके समाज के पूर्वज महाराणा संग्राम सिंह उर्फ राणा सांगा को सदन में गद्दार बताकर अपमानजनक गाली दी।
आरोप है कि उसके बाद सुमन ने 22 मार्च को अपने कथन पर मांगे स्पष्टीकरण में पुनः सोशल मीडिया के माध्यम से सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने, जातीय संघर्ष फैलाने, सस्ती लोकप्रियता बटोरने की खातिर भड़काऊ बयान देकर भावनाओं को आहत करने के इरादे से सदन में दिए गए वक्तव्य को सही ठहराते हुए अपनी टिप्पणी की पुष्टि की।
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आरोप है कि सपा सांसद ने सच्चे राष्ट्रभक्त, हिंदुत्व के पुरोधा, वीर शिरोमणि, सनातन धर्म के संरक्षक राणा सांगा का अपमान एवं उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल कर उन्हें व उनके समस्त समाज को इरादतन अपमानित एवं बेइज्जत किया है, जो अपराध है।