सामान्य जीवन की ओर बढ़े कदम
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. गोपाल वर्मा ने बताया कि क्लब फुट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं। उपचार की प्रक्रिया लंबी और धैर्य वाली होती है। सिलसिलेवार प्लास्टर चढ़ाने और विशेष जूतों (ब्रेसिज़) के इस्तेमाल के बाद बच्चों के पैर अब पूरी तरह सामान्य हो गए हैं। उपचार के बाद अब ये बच्चे न केवल खड़े हो पा रहे हैं, बल्कि बिना किसी सहारे के चलना भी सीख रहे हैं।
इस तरह से होती है पहचान
क्लब फुट से ग्रसित बच्चों की पहचान अधिकतर प्रसव केंद्र पर ही हो जाती है। यदि बच्चा यहां छूट जाता है तो आशा-एएनएम नियमित टीकाकरण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम के जरिये पकड़ में आ जाते हैं। जिले में 15 आरबीएसए की टीम हैं, जो गांव-गांव जाकर जन्मजात बीमारियों की जांच करती हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- जल्द उपचार, बेहतर परिणाम : यदि जन्म के शुरुआती महीनों (शून्य से तीन माह) में ही इलाज शुरू हो जाए, तो बच्चे के हाथ-पैर पूरी तरह सामान्य हो सकते हैं।
- जटिलता का खतरा : उपचार में देरी होने पर हड्डियां सख्त हो जाती हैं, जिससे भविष्य में बच्चे को चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई हो सकती है। फिर ऑपरेशन की नौबत आ जाती है।
- नियमित फॉलोअप : डॉ. गोपाल वर्मा ने बताया कि बच्चों को नियमित फॉलोअप के लिए भी बुलाते हैं, ताकि शारीरिक विकास की निगरानी की जा सके।
इलाज के तरीके
- प्लास्टर : 4-6 सप्ताह तक हर हफ्ते पैर की स्थिति सुधारने के लिए प्लास्टर लगाया जाता है।
- टेनोटॉमी : यदि आवश्यक हो, तो एड़ी के टेंडन को ढीला करने के लिए एक छोटी सर्जरी की जाती है।
- ब्रेसिंग : पैर को सही स्थिति में रखने के लिए पांच साल की उम्र तक विशेष जूते पहनने होते हैं।
वर्ष मामले
2022 - 16
2023 - 20
1024 - 38
2025 - 40
2026 - 04