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Good News: नन्हे कदमों को मिली नई उड़ान, टेढ़े-मेढ़े पैर की समस्या से जूझ रहे 118 बच्चे हुए अपने पैरों पर खड़े

Tue, 12 May 2026 11:50 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

क्लब फुट ऐसी समस्या है जिसमें बच्चे के पैर जन्म से ही अंदर की ओर मुड़े होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 1000 बच्चे में एक को यह समस्या होती है। सही समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बच्चे उम्र भर के लिए दिव्यांग हो जाते हैं।
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जिला अस्पताल में क्लब फुट से जूझ रहे नवजात का उपचार करते आर्थो सर्जन डॉ गोपाल वर्मा - फोटो : विभाग
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विस्तार
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हाथरस जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चार साल में 118 बच्चों के जीवन में नई रोशनी भरी है। जन्मजात विकलांगता यानी क्लब फुट (टेढ़े-मेढ़े पैर) से जूझ रहे इन बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बनाया गया है। कभी लाचारी में रेंगने को मजबूर ये नन्हे कदम अब नई उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

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क्लब फुट ऐसी समस्या है जिसमें बच्चे के पैर जन्म से ही अंदर की ओर मुड़े होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 1000 बच्चे में एक को यह समस्या होती है। सही समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बच्चे उम्र भर के लिए दिव्यांग हो जाते हैं। जिला अस्पताल में विशेष कार्यक्रम के तहत संचालित क्लब फुट क्लीनिक के जरिये पिछले चार वर्षों में अब तक 118 बच्चों को लाभ हुआ है। चिकित्सकों की टीम ने पोंसेटी तकनीक (प्लास्टर और मामूली सर्जरी) के जरिये इन बच्चों के पैरों को सीधा किया। हर शनिवार को एक एनजीओ की मदद से जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में कैंप भी लगाया जाता है।

क्लब फुट गंभीर समस्या है, जो जीवनभर अपंगता का कारण बन सकती है, इसलिए जन्म होते ही उपचार जरूरी है। अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। आरबीएसके की टीम व आशा, एएनएम जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को चिह्नित करती हैं और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाती हैं।-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ
जन्म के समय बच्चे के पैरों में जरा सा भी टेढ़ापन दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें। जिला अस्पताल में इसके उपचार की पर्याप्त व्यवस्था है। पिछले चार वर्षों में करीब 118 बच्चों को लाभ मिला है।-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस

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सामान्य जीवन की ओर बढ़े कदम
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. गोपाल वर्मा ने बताया कि क्लब फुट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं। उपचार की प्रक्रिया लंबी और धैर्य वाली होती है। सिलसिलेवार प्लास्टर चढ़ाने और विशेष जूतों (ब्रेसिज़) के इस्तेमाल के बाद बच्चों के पैर अब पूरी तरह सामान्य हो गए हैं। उपचार के बाद अब ये बच्चे न केवल खड़े हो पा रहे हैं, बल्कि बिना किसी सहारे के चलना भी सीख रहे हैं।

इस तरह से होती है पहचान
क्लब फुट से ग्रसित बच्चों की पहचान अधिकतर प्रसव केंद्र पर ही हो जाती है। यदि बच्चा यहां छूट जाता है तो आशा-एएनएम नियमित टीकाकरण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम के जरिये पकड़ में आ जाते हैं। जिले में 15 आरबीएसए की टीम हैं, जो गांव-गांव जाकर जन्मजात बीमारियों की जांच करती हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
  • जल्द उपचार, बेहतर परिणाम : यदि जन्म के शुरुआती महीनों (शून्य से तीन माह) में ही इलाज शुरू हो जाए, तो बच्चे के हाथ-पैर पूरी तरह सामान्य हो सकते हैं।
  • जटिलता का खतरा : उपचार में देरी होने पर हड्डियां सख्त हो जाती हैं, जिससे भविष्य में बच्चे को चलने-फिरने में गंभीर कठिनाई हो सकती है। फिर ऑपरेशन की नौबत आ जाती है।
  • नियमित फॉलोअप : डॉ. गोपाल वर्मा ने बताया कि बच्चों को नियमित फॉलोअप के लिए भी बुलाते हैं, ताकि शारीरिक विकास की निगरानी की जा सके।

इलाज के तरीके
  • प्लास्टर : 4-6 सप्ताह तक हर हफ्ते पैर की स्थिति सुधारने के लिए प्लास्टर लगाया जाता है।
  • टेनोटॉमी : यदि आवश्यक हो, तो एड़ी के टेंडन को ढीला करने के लिए एक छोटी सर्जरी की जाती है।
  • ब्रेसिंग : पैर को सही स्थिति में रखने के लिए पांच साल की उम्र तक विशेष जूते पहनने होते हैं।

वर्ष मामले
2022 - 16
2023 - 20
1024 - 38
2025 - 40
2026 - 04
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