फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras News: निजी वाहनों में ठूंस-ठूंसकर स्कूल पहुंचाए जा रहे बच्चे

Thu, 09 Jul 2026 01:59 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
विज्ञापन
अलीगढ़ रोड पर निजी वाहन में बैठकर जाते क्षमता से अधिक बच्चे। संवाद - फोटो : Samvad
विज्ञापन
जिले में तमाम प्रयासों और प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद निजी वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल लाने-ले जाने का सिलसिला थम नहीं रहा। कई स्थानों पर बिना स्कूल परमिट वाले ऑटो, ई-रिक्शा, वैन और अन्य निजी वाहन बच्चों को ढोने में लगे हैं, जिससे हर दिन हादसे का खतरा बना रहता है।
विज्ञापन

शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सुबह और दोपहर के समय बड़ी संख्या में निजी वाहन स्कूली बच्चों से खचाखच भरे नजर आते हैं। कई वाहनों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। कई बच्चे दरवाजे पर लटककर अथवा चालक के बराबर बैठकर सफर करने को मजबूर हैं।
इसके बावजूद इन वाहनों की नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कई विद्यालयों के पास स्वयं के परिवहन के साधन नहीं हैं। कुछ विद्यालयों ने मानक पूरे करने वाले स्कूल वाहनों की व्यवस्था भी नहीं की है। ऐसे में अभिभावक मजबूरी में निजी वाहनों से बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। निजी वाहन चालक मनमाने ढंग से बच्चों को भरकर ले जाते हैं।
विज्ञापन


स्कूली वाहनों में ये सुविधाएं जरूरी
परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूल वाहनों में सुरक्षा संबंधी सभी मानकों का पालन, फिटनेस प्रमाणपत्र, अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार किट, प्रशिक्षित चालक तथा परिचालक की व्यवस्था अनिवार्य है। इनके बिना बच्चों का व्यावसायिक परिवहन नियमों के विरुद्ध है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा।

स्कूली वाहनों में बच्चों की आवाजाही पर विशेष निगाह है। जो स्कूली वाहन नियमों का उल्लंघन करते नजर आते हैं, उन पर कार्रवाई की जाती है।
-लक्ष्मण प्रसाद, एआरटीओ

हर वर्ष चलाया जाता है अभियान
जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा समय-समय पर स्कूल वाहनों की जांच का अभियान चलाया जाता है। फिटनेस, परमिट, चालक के दस्तावेज और सुरक्षा मानकों की जांच भी की जाती है। इसके बावजूद अभियान समाप्त होते ही निजी वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने का सिलसिला फिर शुरू हो जाता है। नियमित निगरानी और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय किए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें