चेतन के पैतृक गांव मीतई में ताऊ दिनेश सिंह और भगवान सिंह रहते हैं। दोनों रेलवे से रिटायर्ड हैं। चाचा महेंद्रपाल सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं। वह भी मीतई में रहते हैं। सेना से सेवानिवृत्त एक और चाचा मुकेश बाबू मथुरा में रहते हैं। एक चाचा दलपत सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। चेतन के पिता बच्चू सिंह नौकरी की अवधि में अपने गांव से रतलाम जाकर रहने लग गए थे।
गांव में अब चेतन का महज एक प्लॉट
चेतन के पिता गांव की करीब ढाई बीघा जमीन को बेचकर रतलाम में परिवार सहित शिफ्ट हो गए थे। हालांकि गांव में अभी चेतन का एक सड़क किनारे करीब 70 वर्ग गज का प्लॉट है। यह प्लॉट खाली पड़ा है।
फुटबॉल खिलाड़ी था चेतन
चेतन फुटबॉल का बेहतरीन खिलाड़ी था। चेतन रेलवे की ओर से कई खेलों में खेलने के लिए कई स्थानों पर गया था। यहां तक कि खेल मंत्रालय की ओर से होने वाले खेलों में चेतन ने अपना प्रदर्शन दिया था। कई खेलों से चेतन ने मेडल जीतकर गांव के साथ साथ रेलवे का भी मान रखा था।
डेढ़ साल पहले पैतृक गांव आया था चेतन
कांस्टेबल चेतन पैतृक गांव कम ही आया करता था। चाचा के बेटे की शादी में भी चेतन गांव में नहीं आ पाया था। परिजनों ने बताया कि शायद छुट्टी न मिल पाने के कारण चेतन नहीं आ पाया था। ताऊ भगवान सिंह ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले चेतन गांव आया था। चेतन का स्वभाव मृदुल था। जब डेढ़ साल पहले वह आया तो उसने आते ही उनके और परिवार के सभी बुजुर्गों के पांव छुए थे।