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Hathras: पेट्रोल पंप खुलवाने के नाम पर 32.45 लाख की ठगी, मध्य प्रदेश का युवक गिरफ्तार, ऐसे ठगा

Sat, 27 Dec 2025 10:09 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

आवेदन करने के बाद फर्जी वेबसाइट चलाने वाले शातिरों ने अलग-अलग प्रोसेस करने के नाम पर कुल 32 लाख 45 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। फिर वेबसाइट खुलना भी बंद हो गई।
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पकड़ा गया आरोपी - फोटो : पुलिस
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विस्तार
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पेट्रोल पंप डीलरशिप की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए हाथरस साइबर सेल ने मध्य प्रदेश के युवक को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। सादाबाद के व्यापारी से 32.45 लाख रुपये की ठगी होने के बाद पुलिस हरकत में आई थी। 

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एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा ने बताया कि सादाबाद के गांव कुरसंडा निवासी अनिल कुमार ने साइबर सेल में ठगी की शिकायत की थी। अनिल ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन साइट पेट्रोल पंप केएसके डीलरशिप पर पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया था। इसी साइट से उन्हें जानकारी मिली थी कि पंप के लिए जगह खाली है। 

आवेदन करने के बाद फर्जी वेबसाइट चलाने वाले शातिरों ने उनसे 27 जनवरी 2025 से 23 अप्रैल 2025 तक अलग-अलग प्रोसेस करने के नाम पर कुल 32 लाख 45 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद अनिल से इन लोगों ने कोई संपर्क नहीं किया। वेबसाइट खुलना भी बंद हो गई। शक होने पर उन्होंने मथुरा रिफाइनरी संपर्क किया तो पता चला कि वेबसाइट फर्जी थी। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल में शिकायत की थी। 

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साइबर टीम ने वेबसाइट बनाने वाली अमेरिक बेस्ट कंपनी से संपर्क किया और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से भी फर्जी पेट्रोल पंप कंपनी की सत्यता पता की। छानबीन में पता चला कि वेबसाइट का डोमेन छोटे राजा परिहार निवासी ग्राम गागौनी थाना सिहोर जिला शिवपुरी ने खरीदा था। उसी ने फ्राॅड कर रुपये हड़पे थे। फिलहाल छोटे राजा ग्वालियर के थाना मुरार क्षेत्र में रह रहा था। 

एसपी ने बताया कि छानबीन के बाद छोटे राजा के पीछे पुलिस टीम लगी। साइबर सेल ने 26 दिसंबर को उसे ग्वालियर में कल्याण हॉस्पिटल के सामने से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में छोटे राजा ने बताया कि उसने अपने साथियों के साथ फर्जी जीमेल आईडी के माध्यम से फर्जी वेबसाइट बनाकर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से फर्जी पेट्रोल पंप की विज्ञप्ति निकाली थी।

उसने अनिल के अलावा कई लोगों से ठगी की गई। फर्जी सिम कार्ड व खाते साथी लाकर देते थे। वह उन्हें दस फीसदी हिस्सा देता था। साथ ही जो लोग ठगी गई रकम खाते से निकालते थे, उन्हें 20 प्रतिशत हिस्सा देता था। वह वेबसाइट का संचालन गाजियाबाद से करता था। एसपी ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है।
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