हाथरस की एक दुकान पर रबड़ी तैयार करते कारीगर
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ओडीओसी योजना का मुख्य उद्देश्य सदियों पुराने स्थानीय खाद्य उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। सरकार की इस पहल से न केवल सदियों पुरानी पाक कला को नया जीवन मिल रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबारियों, हलवाइयों और किसानों के लिए रोजगार के व्यापक अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
इन व्यंजनों का दिखेगा जलवा
आगरा के पेठा, दालमोठ, गजक और पराठा, मथुरा के पेड़ा, छप्पनभोग, माखन मिश्री और तरौली की रबड़ी, मैनपुरी के सोहन पापड़ी और भुना हुआ आलू, फिरोजाबाद की आलू टिक्की और कचौड़ी, अलीगढ़ के डेयरी उत्पाद, कचौड़ी और इगलास की चमचम, हाथरस की रबड़ी, गोरखपुर के लिट्टी चोखा, लहसुन वाले छोले-समोसे और बर्फी, कानपुर के समोसे, लड्डू और मलइयो, लखनऊ की रेवड़ी, आम के उत्पाद और मलाई मक्खन, वाराणसी की तिरंगा बर्फी, ठंडाई व लस्सी, कचौरी, बनारसी पान, लौंग लता और मलइयो, जौनपुर की इमरती, एटम बम मिठाई और जौनपुरी मूली, शामली के गुड़ आधारित उत्पाद, चाट व पलंग तोड़ मिठाई ट्रेड शो में जलवा दिखाएंगे।