जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा मथुरा की जांच में सिकंदराराऊ की एक फर्म द्वारा घड़ियों के व्यापार की आड़ में करोड़ों रुपये के सीमेंट और अन्य वस्तुओं के बिल जारी करने का मामला सामने आया है। मामले की जांच पूरी होने के बाद विभाग ने फर्म पर लगभग 1.30 करोड़ रुपये का कर और जुर्माना निर्धारित किया है, जिसकी धनराशि कारोबारी द्वारा जमा करा दी गई है।
सिकंदराराऊ के कासगंज रोड स्थित गांव बारमऊ में संचालित फर्म कमल एक्सपोर्ट पर विशेष अनुसंधान शाखा मथुरा की टीम ने कुछ समय पूर्व जांच और सत्यापन की कार्रवाई की थी। विभाग को इस फर्म की कारोबारी गतिविधियों को लेकर संदेह था, जिसके आधार पर दस्तावेजों और मौके पर उपलब्ध स्टॉक की जांच की गई। जांच के दौरान अधिकारियों को परिसर में ऑनलाइन घड़ियों के कारोबार से संबंधित स्टॉक और गतिविधियां मिलीं, जबकि रिकॉर्ड में फर्म द्वारा सीमेंट समेत अन्य वस्तुओं के करोड़ों रुपये के बिल जारी किए गए थे। इस फर्म का पंजीयन घड़ियों के कारोबार के लिए कराया गया है।
जब अधिकारियों ने सीमेंट कारोबार से संबंधित स्टॉक, गोदाम अथवा अन्य भौतिक व्यवस्थाओं का सत्यापन किया तो मौके पर ऐसा कोई कारोबार संचालित होता नहीं मिला। ऐसे में माना गया कि फर्म द्वारा वास्तविक कारोबार नहीं किया जा रहा था, सिर्फ सीमेंट के बिल जारी किये जा रहे थे। इन्हीं बिलों के आधार पर कारोबारी की ओर से सीमेंट की आईटीसी क्लेम की जा रही थी। जिस पर 1.30 करोड़ रुपये का कर और जुर्माना लगाया गया।
विशेष अनुसंधान शाखा मथुरा के संयुक्त आयुक्त अनिल कुमार कनौजिया ने बताया कि कर चोरी और फर्जी बिलिंग पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में संदिग्ध कारोबारियों और फर्मों के लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।