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Hathras News: जन्म निजी अस्पताल में, इलाज के लिए भरोसा सरकारी का

Sat, 01 Aug 2026 02:47 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात ​शिशु। संवाद - फोटो : Samvad
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प्रसव के लिए भले ही लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं लेकिन गंभीर बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए लोग सरकारी अस्पताल पर भरोसा जता रहे हैं। जिला महिला अस्पताल स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के हालिया वार्षिक आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं।
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वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार एसएनसीयू में भर्ती होने वाले कुल बच्चों में 69 प्रतिशत बच्चे निजी या बाहर के अस्पतालों में जन्म लेने वाले थे। राहत की बात यह है कि यहां से 71 प्रतिशत नवजात पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं।
शहर के निजी अस्पताल में एसएनसीयू का एक दिन का खर्च बीमारी के अनुसार पांच से 10 हजार पड़ता है। साथ ही यहां गंभीर नवजातों को भर्ती करने से चिकित्सक झिझकते हैं। इन दोनों कारणों से लोग महिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू पर भरोसा कर रहे हैं। 12 बेड के इस वार्ड में हर माह 100 से 120 बच्चे भर्ती किए जाते हैं।
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सामने आए प्रमुख मामले
केस-1: मुरसान की रहने वाली हेमा ने 15 जुलाई को एक निजी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था, जिसका वजन मात्र 885 ग्राम था। चिकित्सकों की सलाह पर उसे जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार अभी भी जारी है।
केस-2: शहर की रहने वाली डॉली ने 28 जुलाई को पुत्र को जन्म दिया। बच्चे का वजन मात्र 1755 ग्राम होने और बेहद कमजोर होने के कारण उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां से पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद शुक्रवार को उसे छुट्टी दे दी गई।
केस-3: सासनी निवासी सौरभ की पत्नी ने 29 जुलाई को बेटी को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद बच्ची के न रोने और उसकी हरकतें कम होने के कारण उसे तुरंत सरकारी अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

एक वर्ष के आंकड़े एक नजर में
कुल भर्ती नवजात : 1,290
इन-बॉर्न (अस्पताल में जन्मे) : 398 (31%)
आउट-बॉर्न (बाहर जन्मे) : 892 (69%)
लिंग आधारित आंकड़े : कुल भर्ती बच्चों में 796 लड़के और 494 लड़कियां शामिल थीं।
डिस्चार्ज (स्वस्थ हुए बच्चे) : कुल 919 नवजात (लगभग 71%) सफलतापूर्वक स्वस्थ होकर अपने घर लौटे।
रेफर किए गए मामले : बेहतर या उच्च चिकित्सा उपचार के लिए 232 बच्चों को अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया।
लामा के मामले : 91 बच्चों को उनके परिजनों द्वारा अपनी मर्जी यानी लामा (लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) से अस्पताल से ले जाया गया।
मृत्यु के आंकड़े : इलाज के दौरान 39 नवजातों की मृत्यु दर्ज की गई।

एसएनसीयू में कम वजन व जन्म के बाद न रोने वाले बच्चों की संख्या अधिक रहती है। बाहर से अधिक बच्चे आ रहे हैं। इनमें संक्रमण की भी समस्या रहती है। रेफर का औसत 18 फीसदी है। अधिकतर बच्चे सही होकर ही निकलते हैं। वार्ड के विस्तार के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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-डॉ. डीएम सक्सेना, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला अस्पताल
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