बाजरे की कटाई-मड़ाई को काम समेटने के लिए खेत पर पहुंचते ही हिया फट गयौ, रात ही रात में राम जाने कैसौ वज्रपात भयौ..सबरी बाल खाय गई इल्ली, कछू न छोड़्यौ। जो अनाज हमारी साल भर की रोटी हतौ, बच्चों का पेट भरतौ, वो कीड़ों का निवाला बन गयौ। यह कहना है गांव पल्हावत निवासी किसान मनोज कुमार का।
मनोज बुधवार सुबह खेत पर बाजरे के खेत पर पहुंचे तो सूरज की पहली किरण के साथ ही उनकी उम्मीदें दम तोड़ती नजर आई। इल्ली कीट के झुंड उनकी फसल को चट कर रहे थे। जो फसल कल तक लहलहा रही थी, उसकी हर बाल पर कीट लगे थे। उनका कहना है कि अब रोवे के अलावा कूछू रास्ता नाहीं बचौ है। एक ही रात में इल्ली के झुंड खेतों में फैल गए हैं।
पास में ही मौजूद गजाधर सिंह के खेत का भी यही हाल है। सर्दियों में आलू की फसल पर मौसम की मार पड़ी। उसमें पत्तियों पर झुलसा और जड़ों में गलन रोग लगा। उनका कहना है कि हम तो मन को समझाए बैठे थे कि चलो, आलू की फसल डूब गई, इस बार बाजरे की तगड़ी फसल खड़ी है। 15 बीघा में खड़ा बाजरा बेचकर कर्ज चुका देंगे। आज सुबह जब बाजरे के खेत पर पहुंचे तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। अब सिर पर कर्जे का पहाड़ खड़ा है।
सूचना मिलते ही खेतों की ओर दौड़ पड़े किसान
किसानों के अनुसार गांव पल्हावत में 250 बीघा में बाजरे की फसल बोई गई है। किसान महावीर सिंह ने 30 बीघा में बाजरा की फसल बोई है। उन्होंने गांव में फोन पर सूचना दी कि सब फसल खत्म हो गई है। बाजरा किसान दौड़ कर खेतों पर पहुंचे। राहुल कुमार ने बताया कि उनकी 10 बीघा में रोग फैला है। इसी तरह प्रवीण चौधरी, राहुल चौधरी, करूआ आदि किसानों की फसल खराब हुई। महावीर सिंह बाजार के लिए दौड़े और कीटनाशक लाकर खेत में छिड़काव किया, लेकिन कीड़ों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। आसपास के गांव भी इसे प्रभावित हैं। जिले में लगभग 50000 हेक्टेयर में बाजरी की फसल बोई गई थी। लगभग सभी गांवों में इस कीट का प्रकोप है।
अधिक तापमान से पनपा कंबल कीड़ा
कृषि वैज्ञानिक श्यौराज सिंह ने बताया कि तापमान के अनुसार फसल में कीट उत्पन्न हो जाते हैं, जो कीटनाशक के छिड़काव से चले जाते हैं। इस बार अधिक तापमान के कारण कंबल कीड़ा झुंड या कहें बाल वाली इल्ली झुंड में पनप गयी हैं, जो बड़े पैमाने पर फसल को नुकसान पहुंचा रही हैं। तापमान के चलते पूरे जिले में ही किसानों की फसल प्रभावित है। उन्होंने अधिक तापमान होने पर शाम पांच बजे के बाद छिड़काव करने की सलाह दी है।
ये करें उपाय
-कीटनाशक और स्टीकर का मिश्रण
इमामेक्टिन बेंजोएट : 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी
थियामेथोक्सम : 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी
-स्टीकर / चिपकाने वाला पदार्थ
टिनोपॉल या टिपोल : 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी
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इस समय मेंं बालियां निकल आई है। इस नाजुक मोड़ पर फसल में सूंडी (इल्ली) और गिडार कीट लगने की अत्यधिक संभावना बनी हुई है। यदि समय पर नियंत्रण न किया गया, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इमामेक्टिन बेंजोएट, थियामेथोक्सम, टिनोपॉल या टिपोल में से किसी एक का तय मात्रा के अनुसार प्रयोग करें। निखिलदेव तिवारी, जिला कृषि अधिकारी