स्वास्थ्य और शिक्षा
जिले में अब तक कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं बन सका है। सासनी की पराग डेयरी की भूमि पर मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित है, लेकिन पिछले दो साल से प्रस्ताव भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया में अटका है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए लोग आज भी आगरा-अलीगढ़ जाने को मजबूर हैं। शिक्षा की बात करें तो उच्च शिक्षा के लिए कोई बड़ा संस्थान नहीं है। तकनीकी शिक्षा के लिए आज भी युवाओं को बाहर का रुख करना पड़ता है।
उद्योग और व्यापार
कभी हाथरस को कानपुर के बाद दूसरा औद्योगिक शहर माना जाता था। फिर से उसे वही दर्जा दिलाने का सपना अधूरा है। यहां के प्रसिद्ध दलहन, मूंगा-मोती और कांच उद्योग दम तोड़ रहे हैं। हालांकि हींग, रंग, रबड़ी व गार्मेंट्स का काम आज भी जिले की पहचान को जिंदा रखे है। ओडीओपी में हींग व रेडीमेड गार्मेंट्स शामिल किया गया है। हसायन के इत्र, गुलाब जल और गुलकंद को जीआई टैग मिलना भी एक सकारात्मक उपलब्धि है।
प्रशासनिक ढांचा
जिले में आज भी भूगर्भ जल विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नेडा जैसे महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यालय उपलब्ध नहीं हैं। जिला न्यायालय परिसर व जेल का निर्माण अभी जल रहा है। कोई नया थाना, नगर निकाय या ब्लॉक सृजित नहीं हुआ है। 2012 के विधानसभा चुनाव से पूर्व नए परिसीमन में जिले की सासनी विधानसभा सीट का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया था। इधर, पुलिस विभाग ने खत्म किए गए सासनी सर्किल को अब पुन: सर्किल के लिए प्रस्तावित किया है।
परिवहन की समस्या
जिले में एक बड़ी मांग ट्रांसपोर्ट नगर की रही है, जो 29 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी। अभी तक जगह का भी चयन नहीं हो सका है। इसका सीधा असर स्थानीय उद्योगों और व्यापारिक आवागमन पर पड़ रहा है।