इस साल तपती गर्मी की मार झेलने के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए। अभी अप्रैल का महीना शुरू नहीं हुआ है और अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। सूरज की किरणें अभी से ही तन झुलसाती महसूस हो रही हैं और लोग गर्मी जनित बीमारियों के शिकार होने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला अस्तपाल में लू से निपटने के लिए छह बेड का विशेष वार्ड तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही अस्पतालों में ओआरएस के पैकेट और जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रिजर्व कराया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर यह काम आ सकें। स्वास्थ्य विभाग लोगों को अभी से ही गर्मी से बचाव के लिए एहतियात बरतने की सलाह दे रहा है।
होली तक तो मौसम में ठंडक थी, लेकिन पिछले करीब आठ दिन से लगातार पारा ऊपर की ओर जा रहा है। नतीजा यह है कि 27 मार्च बृहस्पतिवार को पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। आम लोगों को अभी से मई और जून जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। धूप की तपन हलक सुखाने लगी है, जिससे लोगों को ठंडे पानी और शीतल पेय पदार्थों की जरूरत महसूस होने लगी है। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस साल लू का ज्यादा प्रकोप लोगों को झेलना होगा।
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गर्म हवाओं को कहते हैं हीट वेव
जब तापमान 40 डिग्री के पार चला जाता है और गर्म हवाएं चलने लग जाती हैं तो इस स्थिति हीट वेव (लू) कहते हैं। इतने तापमान में लगातार कई घंटों तक बाहर रहने से व्यक्ति लू की चपेट में आ सकता है। आमतौर पर 40 डिग्री से अधिक तापमान में तीन से चार घंटे तक लगातार रहने से शरीर में हीट वेव का असर दिखना शुरू हो जाता है।
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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है हीट वेव
चिकित्सकों की मानें तो हीट वेव का असर किडनी व हार्ट पर पड़ता है। अधिक गर्मी की वजह से पसीना ज्यादा निकलता है और शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है। अगर इस दौरान कोई व्यक्ति पानी कम पीता है तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इससे किडनी के फंक्शन पर असर पड़ने लग जाता है और किडनी फेल भी हो सकती है। इसी प्रकार हार्ट को भी जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है, रक्त गाढ़ा हो जाता है और धमनियां कड़ी हो जाती हैं तो इससे हार्ट फेल हो सकता है।
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गर्मी से बीमारी के यह हैं लक्षण
अचानक तेज सिर दर्द होना, पसीना बहुत ज्यादा आना या बिल्कुल न आना, चक्कर आना, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द आदि लू लगने के लक्षण हैं। अगर इन लक्षणों के दिखने पर मरीज को तुरंत संभाला न जाए और समय पर इलाज न हो तो स्थिति काफी खराब हो सकती है। हमारे शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। इस तापमान पर हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है। गर्मी बढ़ने पर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37 डिग्री सेल्सियस तापमान मेंटेन रखता है। जब बाहर का तापमान सामान्य से बढ़ जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37 डिग्री से ऊपर पहुंचने लगता है। कुछ समय बाद रक्त गरम होने लगता है। ब्लड प्रेशर लो हो जाता है और महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त की आपूर्ति रुक जाती है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-लू चलने के दौरान सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने की बजाय घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।
-लगातार थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए, कम से कम 3-4 लीटर पानी जरूर पीएं।
-किडनी की बीमारी से ग्रस्त लोग प्रतिदिन कम से कम अपने डॉक्टर से कंसल्ट कर और अधिक पानी पीएं।
-जहां तक संभव हो, ब्लड प्रेशर पर नजर रखें, ठंडे पानी से नहाएं।
-इस मौसम में मांंसाहारी भोजन न करें या कम से कम करें।
-दैनिक खाने में फल और सब्जियों को भोजन में ज्यादा स्थान दें।
-कूलर के उपयोग से कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
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मार्च माह में पिछले पांच सालों का अधिकतम तापमान।
वर्ष
अधिकतम तापमान
तारीख
2019
40 डिग्री
30 मार्च
2020
35 डिग्री
31 मार्च
2021
40 डिग्री
29 मार्च
2022
41 डिग्री
31 मार्च
2023
35 डिग्री
29 मार्च
2024
39 डिग्री
29 मार्च
2025
38 डिग्री
25 मार्च
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पिछले साल भी लगभग इतना ही तापमान रहा था। मार्च माह खत्म होने से पहले हो सकता है कि एक डिग्री का इजाफा मार्च में हो जाए। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस साल भी जनपद का अधिकतम तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।
-लेखराज सिंह, जिला समन्वयक, आपदा प्रबंधन, हाथरस।