गर्मी और हालिया बारिश के बाद जिले में उल्टी, दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिससे जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में ग्लूकोज की खपत बढ़ गई है।
अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं। मरीजों में निर्जलीकरण की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों को आईवी फ्लूयड (ड्रिप) के जरिये उपचार करना पड़ रहा है, जिससे अस्पतालों में ग्लूकोज, आरएल, एनएस और डीएनएस फ्लूयड की खपत लगभग दोगुनी हो गई है।
चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव, तेज गर्मी और उमस के कारण फूड पॉइजनिंग तथा डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं। गर्मी में बैक्टीरिया तेजी से पनपने से दूषित भोजन और पानी के सेवन से लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत हो रही है। कई मरीजों का ब्लड प्रेशर अत्यधिक कम हो जाने के कारण उन्हें अर्धबेहोशी की हालत में अस्पताल लाया जा रहा है।
फिजिशियन डॉ. वरुण ने बताया कि ऐसे मरीजों को तत्काल राहत देने और शरीर में पानी की कमी दूर करने के लिए आईवी फ्लूयड चढ़ाना जरूरी हो जाता है। जहां पहले हर माह करीब 6,500 बोतलों की सप्लाई होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 12 हजार तक पहुंच गया है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 100 से 125 बोतलों की खपत हो रही है, जबकि प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर रोजाना 15 से 20 ड्रिप उपयोग में लाई जा रही हैं।