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निजीकरण के विरोध में गरजे बैंक कर्मी, किया प्रदर्शन

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अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते बैंकों के कर्मचारी व अधिकारी। - फोटो : HATHRAS
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंककर्मियों व अधिकारियों ने हड़ताल पर रहकर धरना प्रदर्शन किया। बैंक कर्मी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के खिलाफ, खराब ऋणों की वसूली के लिए सख्त कानून बनाने, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में ग्यारहवें द्विपक्षीय समझौते के अनुसार वेतन देने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने तथा लंबे समय से अधीनस्थ वर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने आदि मांगों को लेकर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक के सामने प्रदर्शन किया।
बैंक कर्मियों को संबोधित करते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के जिला संयोजक बीएस जैन ने कहा कि निजी बैंकों का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना रहता है। जिस कारण वे न तो सस्ता ऋण देना चाहते हैं और न ही ग्रामीण क्षेत्रों में अपना प्रचार करते हैं।
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इसी कारण1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। उसके बाद सन 1980 में छह बैंकों का और राष्ट्रीयकरण किया गया। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की जमा राशि तथा ऋण राशि में भारी बढ़ोतरी हुई। देश के राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मचारियों ने मेहनत की। जिसके कारण देश के अंदर हरित क्रांति व श्वेत क्रांति हुई।
मौजूदा सरकार जहां बैंकों का विलय कर रही है। वहीं अब बैंकों का निजीकरण करने पर आमादा है। बैंकों का निजीकरण जनविरोधी, अर्थव्यवस्था विरोधी और कामगार विरोधी हैं। इसीलिए दृढ़ता से संघर्ष किया जाना चाहिए। उन्होंने आज की सफल हड़ताल व धरना प्रदर्शन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
यूपी बैंक एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष वीके शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की छवि को जानबूझकर खराब किया जा रहा है। उद्योगपति सत्ताधारी नेताओं और नौकरशाह से सांठगांठ करके अपना हित साधते हैं। बैंकों के अधिकारियों पर सत्ताधारी पार्टी के नेता दबाव बनाकर ऋण कराते हैं। जिनकी वसूली नहीं हो पाती है। सरकार का बैंकों को निजीकरण करना देश विरोधी है।
आर्यावर्त ग्रामीण बैंक अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष पदम सिंह ने कहा कि ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को अभी तक 11 वें द्विपक्षीय समझौते के अनुसार वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। ग्रामीण बैंक का कर्मचारी राष्ट्रीयकृत बैंकों में उपलब्ध पुरानी पेंशन को चाहता है।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में लंबे समय से अधीनस्थ कर्मचारी नियमित कार्य कर रहे हैं। फिर भी उनको स्थायी नहीं किया जा रहा है। निजीकरण में लाने की सरकार की नीति की कड़े शब्दों में निंदा की। एनओबीओ के प्रतिनिधि नितिन साहू ने कहा कि बैंकों को ही नहीं बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र को भीे जानबूझकर महत्वहीन बनाया जा रहा है। सरकार का निजीकरण के रास्ते पर जाना देश हित में नहीं है।
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संचालन जीके शर्मा ने किया। इस मौके पर में पीआर शर्मा, संजय गौतम, पीयूष श्रीवास्तव, सीबी सिंह, राकेश कुमार वर्मा, डीसी गुप्ता, यतेश गर्ग, उमाशंकर जैन, सोनू कुमार, श्रीकांत, रवि राकेश, संजय जैन, अशोक शर्मा, भजनलाल, ओम प्रकाश, हुकुम सिंह, सुरेश चंद्र, राकेश कुमार, अरुण वर्मा, पुष्पांकर जैन, राजेश जैन, अरविंद जैन, मनोज सिंह आदि थे।

बैंकों की हड़ताल के चलते एटीएम पर लगी भीड़। - फोटो : HATHRAS

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