यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर जनविरोधी बैंकिंग सुधारों को रोकने, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण न किए जाने सहित अन्य कई मांगो को लेकर बुधवार को सभी बैंकों के अधिकारी व कर्मियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर प्रदर्शन किया।
फोरम के जिला संयोजक बीएस जैन ने कहा कि 19 जुलाई 1969 को एक बड़े राजनीतिक फैसले के तहत देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। उसके बाद 6 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की उपलब्धियां और योगदान देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि और विकास में अभूतपूर्व और बेजोड़ रहा है। केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विखंडित करना चाहती है और निजी क्षेत्र की बैंकों को प्रोत्साहित कर रही है। आज बैंक एक मात्र मुख्य चुनौती का सामना कर रहे हैं, जो चिंताजनक रूप से बढ़ते हुए खराब ऋण हैं। पूरे देश का बैंक कर्मचारी 22 अगस्त को हड़ताल पर होगा।
15 सितंबर को एक लाख बैंककर्मी संसद पर मार्च करेंगे। फिर भी सरकार ने सार्थक कार्यवाही नहीं की तो अक्तूबर/नवंबर में दो दिन की निरंतर हड़ताल होगी। एनसीबीई के साथी अशोक कुमार यादव ने कहा कि सरकार की राष्ट्रीयकृत बैंकों का निजीकरण करने की नीति देशहित में नहीं है इस मौके पर यूपी बैंक इम्प्लाईज यूनियन के जिलाध्यक्ष वीके शर्मा, संतोष कुमार सिंह, राकेश वर्मा, एके सिंह, उमाशंकर जैन, लोकेश गौतम, नवल किशोर, ओमप्रकाश, हुकुम सिंह, रवि राकेश, महेंद्र कुमार, विवेक यादव, केडी भारद्वाज, मनीष, सतेंद्र, प्रवीन कुमार, हिमांशु श्रीवास्तव, क्षेत्रपाल सिंह, गया प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, राकेश कुमार सारस्वत, योगेश वार्ष्णेय, सोनू बर्नवाल, अरविंद जैन, सूरजपाल, उम्मेद कुमार, इतवारी लाल, राजेंद्र कुमार, शोभित वर्मा, राजवीर सिंह, डीके रायकवार, केतन गुप्ता, अशोक आदि थे।