चौबे वाले महादेव पर दुग्धाभिषेक करते भक्त।
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हाथ में पूजा का थाल, उसमें बेलपत्र, पुष्प, दीप और बम बम का उच्चारण। महाशिवरात्रि पर्व पर हर शिवालय में यही दृश्य देखने को मिला। कहीं फूल बंगला सजाए गए तो कहीं भोले भंडारी का भस्म से शृंगार किया गया। भोर होते ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ लग गई।
कोई सिर पर कलश तो कोई कंधे पर कांवड़ लिए भोले के द्वार पहुंचा। कुछ भक्तों की टोली ढोल-नगाड़ों की धुनों पर झूमती नजर आईं। जेहर प्रथा भी धूमधाम से निभाई गई।
भक्ति का आलम ऐसा रहा कि प्रत्येक मंदिर हर-हर महादेव से गुंजायमान हो गया। शिवलिंग पर दूध, धतूरा तो किसी ने गंगाजल चढ़ाकर भोले बाबा की आराधना की। देर शाम मंदिरों में महाआरती हुई। भक्तों ने जगह-जगह भंडारे का आयोजन कर प्रसाद भी बांटा।
शहर, कस्बों व देहात के शिव मंदिरों में शिव भक्ति गीत और भजनों की गूंज सुनाई देने लगी। भक्तों ने दुग्ध मिश्रित जल और गंगाजल से भगवान शिव परिवार की प्रतिमाओं का अभिषेक किया। बेलपत्र, फल, फूल, भांग, धतूरा, मिष्ठान्न, रोली-चावल आदि सामग्री से उनका पूजन किया और सामूहिक रूप से भोलेनाथ की आरती उतारी। दोपहर तक मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वालों का तांता लगा रहा। मंदिरों में काफी लबी लाइनें लगी रहीं।