योजना लागू हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन यह केवल ऑनलाइन पर्चे तक ही सीमित है। पर्चे भी तब बनते हैं, जब मरीज काउंटर पर पहुंचता है। आभा एप से टोकन जनरेट करने के लिए जगह-जगह अस्पताल में क्यूआर कोड चस्पा किए जा चुके हैं, लेकिन कोई इन्हें स्कैन नहीं कर रहा। टोकन जनरेट कर भी लेते हैं, फिर भी ऑनलाइन पर्चा प्रिंट कर निकलवाना ही होगा। जिला अस्पताल में बुधवार को 715 पर्चे बनाए गए, जिनमें से ऑनलाइन पर्चे 91 रहे। इनकी हार्ड कॉपी मरीजों को थमाई गई।
लखनऊ ट्रेनिंग पर भेजे गए चिकित्सक
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत जिला अस्पताल से एक चिकित्सक व एक सपोर्टिंग स्टाफ को ट्रेनिंग के लिए लखनऊ भेजा गया है। इस योजना को लागू करने में आ रही दिक्कतों के साथ ही क्रियान्वयन के तरीकों पर विचार होगा। बुधवार को यह टीम लखनऊ गई है।