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ABDM: चार साल में भी नहीं बनी मरीजों की यूनिक आईडी, ऑनलाइन पर्चे तक सिमटा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन

Thu, 25 Dec 2025 11:15 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

योजना लागू हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन यह केवल ऑनलाइन पर्चे तक ही सीमित है। पर्चे भी तब बनते हैं, जब मरीज काउंटर पर पहुंचता है। आभा एप से टोकन जनरेट करने के लिए जगह-जगह अस्पताल में क्यूआर कोड चस्पा किए जा चुके हैं, लेकिन कोई इन्हें स्कैन नहीं कर रहा।
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बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में पर्चा बनवाने के लिए लगी मरीजों की कतार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मरीज की मेडिकल हिस्ट्री को डिजिटाइज्ड करने में अभी समय लगेगा। 27 सितंबर 2021 को लांच हुआ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) केवल ऑनलाइन पर्चा जारी करने तक ही सीमित है। कोई भी मरीज या चिकित्सक ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म का प्रयोग नहीं कर रहा। टोकन व्यवस्था शुरू हो चुकी है, लेकिन कोई टोकन जनरेट नहीं कर रहा।

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कोरोना के दौरान पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 15 अगस्त 2020 को देश के 6 केंद्र शासित प्रदेशों में एबीडीएम की शुरुआत हुई। एक साल बाद योजना पूरे देश में लाई गई। इसके तहत आभा एप को लांच किया गया। इसमें पहला चरण मरीजों का आभा कार्ड जारी कर उन्हें 14 अंकों की यूनिक आईडी देना है। आधार कार्ड या डीएल व मोबाइल नंबर से आईडी जनरेट की जा सकती है।

इसी एप में टोकन जनरेट करने की सुविधा है। क्यूआर कोर्ड स्कैन कर टोकन जनरेट किया जा सकता है। टोकन के बाद जिला अस्पताल में पर्चा बनेगा और यही पर्चा डिजिटली ही चिकित्सक के ऑनलाइन पोर्टल पर पहुंचेगा। यहां से दी जाने वाली दवा, जांच आदि का रिकॉर्ड एप में रहेगा, जिनका भविष्य में उपचार के दौरान कहीं भी प्रयोग किया जा सकता है।

एबीडीएम योजना को लागू किया जा चुका है। अभी यह शुरुआती चरण में है। फिलहाल लोगों को टोकन जनरेट करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए आभा एप डाउनलोड कर आभा आईडी जनरेट करनी होगी। धीरे-धीरे मरीज व चिकित्सक इसके अभ्यस्थ होंगे। नागरिक अपनी लैब रिपोटर्स, नुस्खे और टीकाकरण प्रमाणपत्रों को सुरक्षित रख सकते हैं। रिकाॅर्ड पेपरलेस हो जाएगा। इसके तहत ट्रेनिंग के लिए टीम लखनऊ भेजी गई है।-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस बागला जिला अस्पताल

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ऑनलाइन पर्चे तक सीमित व्यवस्था

योजना लागू हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन यह केवल ऑनलाइन पर्चे तक ही सीमित है। पर्चे भी तब बनते हैं, जब मरीज काउंटर पर पहुंचता है। आभा एप से टोकन जनरेट करने के लिए जगह-जगह अस्पताल में क्यूआर कोड चस्पा किए जा चुके हैं, लेकिन कोई इन्हें स्कैन नहीं कर रहा। टोकन जनरेट कर भी लेते हैं, फिर भी ऑनलाइन पर्चा प्रिंट कर निकलवाना ही होगा। जिला अस्पताल में बुधवार को 715 पर्चे बनाए गए, जिनमें से ऑनलाइन पर्चे 91 रहे। इनकी हार्ड कॉपी मरीजों को थमाई गई।
लखनऊ ट्रेनिंग पर भेजे गए चिकित्सक
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत जिला अस्पताल से एक चिकित्सक व एक सपोर्टिंग स्टाफ को ट्रेनिंग के लिए लखनऊ भेजा गया है। इस योजना को लागू करने में आ रही दिक्कतों के साथ ही क्रियान्वयन के तरीकों पर विचार होगा। बुधवार को यह टीम लखनऊ गई है।
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