शनिवार के बाद रविवार को भी बैंकों में अवकाश रहा, जिससे शहर से लेकर कस्बों में लोग एटीएम से पैसा निकालने के लिए पहुंचे, लेकिन एक या दो एटीएम को छोड़कर किसी भी एटीएम में लोगों को पैसा नहीं मिल सका।
बैंकों की छुट्टी के चलते रविवार को एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगीं थीं। लोग कैश निकालने के लिए भारी तादाद में एटीएम पर पहुंचे थे। जिलेभर में एटीएम की संख्या 90 से 100 के बीच है। इन 100 एटीएम में से 95 फीसदी एटीएम सिर्फ शोपीस बने रहे या यूं कहा जाए कि इन एटीएमों में लोगों को कैश ही नहीं मिला। स्क्रीन पर कैश न होने का मैसेज शो होता रहा।
ऐसे में लोग एक से दूसरे एटीएम पर भटकते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। शहर में 35 एटीएम से मात्र चार-पांच एटीएम ही शनिवार को कैश उगल सके। सुबह से ही चिंताहरण रोड स्थित सेंट्रल बैंक, सादाबाद गेट स्थित विजया बैंक के एटीएम पर लोगों की लंबी लाइन लगी रही।
अधिक भीड़ होने की वजह से इन एटीएम में भी दोपहर तक कैश खत्म हो गया। इन एटीएम से कैश निकालने पहुचें काफी लोगों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। लोगों में कैश न मिलने से भारी गुस्सा था।
हाथरस। नोट बंदी के दौर में बैंकों के बाहर कैश निकालने और जमा करने के लिए आ रहे लोगों में दिव्यांग और वरिष्ठजनों के लिए अलग से लाइन बनाए जाने के सरकार के निर्देश हैं, लेकिन इन निर्देशों का जिले की किसी भी बैंक पर पालन नहीं किया जा रहा। एक ही लाइन में दिव्यंाग, वरिष्ठजन और सामान्य लोग खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे में दिव्यांग और वरिष्ठजनों की परेशानी बढ़ गई है। अब लोगों की मौत भी हो रही हैं, लेकिन प्रशासन इसे हल्के में ले रहा है।
वहीं नोटबंदी के दौर में कैशलेस के प्रति युवाआें को जागरूक करने के लिए शनिवार को अलीगढ़ रोड पर एलआईसी के पास स्थित केनरा बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में युवाओं को भुगतान करने की कैशलेस पद्धति का ज्ञान कराया गया।
संस्थान अधिकारी एनके सेंगर ने युवाओं को मोबाइल के जरिए भुगतान करने, कैशलेस लेन-देन, ई वॉलेट के जरिए भुगतान, बैंकों में रुपया ट्रांसफर करने, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का स्वाइप उपयोग व खरीददारी करने के गुर सिखाए। उन्हाेंने बताया कि वर्तमान में ऐसे कई एप मोबाइल पर उपलब्ध हैं, जिससे सुरक्षित तरीके से मोबाइल बैंकिंग की जा सकती है।
अब युवाओं को जेब में नोट नहीं, बल्कि मोबाइल रखने की जरूरत है। नोटबंदी के दौर में मोबाइल बैंकिंग की ही सबसे अधिक उपयोगिता है। उन्हाेंने युवाओं से भुगतान की कैशलेस पद्धति को अपनाने पर जोर दिया और आह्वान किया कि वह अपने आसपास के लोगों को भी इस बारे में जानकारी देकर जागरूक करें।