जिला अस्पताल परिसर में एकत्रित आशा कार्यकर्ता। संवाद
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जिला महिला अस्पताल में प्रसूता व नवजात की मौत मामले में आशा को जिम्मेदार ठहराने पर बुधवार को आशा कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। पहले नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुगढ़ी और फिर सीएमएस कार्यालय के बाहर आशाओं ने हंगामा काटा था। उनका कहना था कि आशा का कार्य केवल प्रसूता को अस्पताल तक लाना है, उन्हें जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है।
शहर के गणेशगंज की रहने वाली पूनम (30) पत्नी ललित को प्रसव के लिए 27 मार्च को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रात लगभग साढ़े आठ बजे उन्होंने बच्चे को जन्म दिया था, जिसके कुछ देर बाद ही बच्चे की मौत हो गई था। प्रसव के दो घंटे बाद पूनम ने भी दम तोड़ दिया था। दोनों की मौत पर अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया तथा अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया था।
जांच के लिए सीएमएस डऍ. सूर्यप्रकाश की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। सोमवार को प्रकरण में स्टाफ के बयान दर्ज किए गए थे और बुधवार को पीड़ित पक्ष को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। बुधवार को सीएमएस कार्यालय में जांच टीम पीड़िता के परिवार के बयान दर्ज कर रही थी। तभी कार्यालय के बाहर आशा कार्यकर्ता एकत्रित हो गईं।
आशा कार्यकर्ताओं का आरोप था कि गणेशगंज की आशा कंचन अग्रवाल पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि उनकी कोई गलती नहीं है। सीएमएस कार्यालय पर एकत्रित होने से पहले सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर आशा कार्यकर्ता पहुंचीं और वहां एमओआईसी से भी नोकझोंक हुई थी।
प्रकरण की गहनता से जांच चल रही है। पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज कराए गए हैं। आशा कार्यकर्ता को भी बयान दर्ज कराने के लिए ही बुलाया गया था, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस