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हाथरस: आइसोलेशन वार्ड के डॉक्टर और स्टाफ को लगेंगी एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन, एडवाइजरी जारी

Tue, 01 Sep 2026 03:48 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

स्वाइन फ्लू के संभावित और पुष्टि वाले मरीजों के उपचार के लिए पृथक आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में 24 घंटे (तीन शिफ्टों में) ड्यूटी दे रहे डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, नर्सिंग स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संक्रमण से बचाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर यह वैक्सीन लगाई जाएगी।
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स्वाइन फ्लू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इन्फ्लूएंजा (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। शासन की एडवाइजरी के बाद आइसोलेशन वार्ड में काम करने वाले डॉक्टर और स्टाफ को एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथरस जिले को 50 एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन मिल गई हैं।

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एमडीटीबी चिकित्सालय में स्वाइन फ्लू के संभावित और पुष्टि वाले मरीजों के उपचार के लिए पृथक आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में 24 घंटे (तीन शिफ्टों में) ड्यूटी दे रहे डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, नर्सिंग स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संक्रमण से बचाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर यह वैक्सीन लगाई जाएगी।

सीएमओ डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि इलाज में लगे मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है ताकि वह बिना भय के मरीजों की देखभाल कर सकें। रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का टीकाकरण किया जा रहा है ताकि अस्पताल परिसर के भीतर संक्रमण का फैलाव रोका जा सके।
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सोमवार की दोपहर सीएमओ ने आइसोलेशन वार्ड में स्टाफ के साथ बैठक की। बताया कि आपात स्थिति देखते हुए अवकाश पर प्रतिबंध लगाया गया है। सी-श्रेणी के मरीजों को तत्काल भर्ती किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मरीजों की तत्काल आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका संपर्क सामान्य मरीज, तीमारदार अथवा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से न हो।

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बगैर सलाह न लें दवाएं
स्वास्थ्य विभाग ने पीड़ितों से आह्वान किया कि बिना चिकित्सक की सलाह के स्वयं से दवाएं न लें। ओसेल्टामिविर जैसी एंटी-वायरल दवाएं हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती हैं, इसलिए चिकित्सक के परामर्श के बाद ही दवा शुरू करें।

यह संकेत दिखें तो तत्काल अस्पताल पहुंचें
  • सांस लेने में तकलीफ अथवा सांस फूलना और सीने में तेज दर्द
  • थूक/बलगम में खून आना या बीपी (रक्तचाप) अचानक कम होना
  • होंठ या नाखून नीले पड़ना, अत्यधिक सुस्ती आना
  • बच्चों में तेज बुखार, खाना-पीना छोड़ना, झटके (दौरे) आना और तेज सांस चलना

बचाव के प्रमुख उपाय
  • खांसते या छींकते वक्त मुंह और नाक को रुमाल या कोहनी से जरूर ढकें।
  • हाथों को बार-बार साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
  • फ्लू के लक्षण होने पर घर पर रहें, मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और क्रॉनिक मरीजों के निकट संपर्क में आने से बचें।
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