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फिर सिस्टम से हार गई एक और जिंदगी

Tue, 15 Aug 2017 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
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दुर्घटना - फोटो : amar ujala
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सिस्टम से एक और जिंदगी हार गई। उपचार न मिल पाने पर सोमवार को कासगंज से मथुरा जा रही पैसेंजर ट्रेन से ओढ़पुरा पर गिरे 20 वर्षीय युवक की मौत हो गई। युवक करीब सवा दो घंटे तक इलाज के लिए तड़पता रहा, लेकिन तीमारदार न मिल पाने के कारण उसे अलीगढ़ के जेएन मेडिकल क़ॉलेज नहीं रेफर किया जा सका। लगभग 75 मिनट बाद जब एक सिपाही को तीमारदार के रूप में भेजा गया, लेकिन तब तक युवक की सांसें थम चुकी थीं। मृतक दिल्ली का निवासी बताया गया है।
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अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में बिना तीमारदार के गंभीर रूप से घायल मरीजों को भर्ती न किए जाने का नियम अभी तक सैकड़ों की जान ले चुका है। सोमवार को इसी सिस्टम की भेंट एक युवक चढ़ गया। उक्त युवक सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे ट्रैक के किनारे घायल हालत में पड़ा मिला था। लोगों को उसके पास से एक मोबाइल फोन, साढ़े तीन हजार रुपये और कई जोड़ी कपड़े मिले। घायल के आसपास देर तक लोग जमा रहे। फिर किसी को उसे अस्पताल पहुंचाने का ख्याल आया। करीब एक घंटे बाद ढाई बजे लोग युवक को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां युवक को देखने के बाद किसी ने युवक की गलत पहचान करते हुए कांशीराम कॉलोनी का बताते हुए कॉलोनी के लोगों को फोन कर दिया।

इस पर कॉलोनी से कई लोग जिला अस्पताल पहुंच गए लेकिन युवक को देखने के बाद वहां से चले गए। उधर, युवक की हालत बिगड़ती जा रही थी। सिर में गहरी चोट के कारण डॉक्टर संतोष गुप्ता ने युवक को प्राथमिक उपचार और उसे जल्द रेफर किए जाने की जरूरत जताई। इसके लिए एंबुलेंस भी मंगा ली गई थी। युवक के फोन से नंबर पता करने की कोशिश हुई लेकिन पासवर्ड होने के कारण परिजनों का नंबर हाथ नहीं लग पा रहा था। एंबुलेंस के स्टाफ ने युवक को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रख दिया लेकिन अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ले जाने से मना कर दिया। एंबुलेंस स्टाफ का कहना था कि मेडिकल कॉलेज में बिना तीमारदार के किसी मरीज को भर्ती नहीं किया जाता। तीमारदार का पता लगाने और उसे सूचित करने की कोशिश शुरू की गई।
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कई लोग युवक के मोबाइल फोन से किसी परिजन का नंबर निकालने में जुटे रहे। एंबुलेंस स्टाफ ने बताया कि अगर पुलिस का कोई होमगार्ड या सिपाही साथ चला जाए तो समस्या हल हो सकती है। युवक की नाजुक हालत देखते हुए एक शख्स ने पहले कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को फोन किया और फोन न उठने पर सीओ सिटी सुमन कनौजिया को फोन किया गया। सीओ के आदेश पर जल्द ही एसएसआई रामवतार एक सिपाही रवेंद्र सिंह को लेकर जिला अस्पताल आ गए और युवक को रेफर किया जा सका। इसके तुरंत बाद डॉक्टर और इमरजेंसी का स्टाफ युवक के फोन में लगा पासवर्ड खोलने में कामयाब हो गए और उसके पिता को सूचित कर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज पहुंचने को कहा। हालांकि इससे पहले ही युवक ने दम तोड़ दिया। पिता मुरारीलाल से फोन पर हुई बातचीत में युवक का नाम अर्जुन निवासी दिल्ली बताया गया। साफ है कि अगर युवक को 75 मिनट पहले रेफर कर दिया जाता तो शायद वह बच जाता।
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