तहसील सदर में धरना-प्रदर्शन करते अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक व अन्य। संवाद
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ई-रजिस्ट्रीकरण मॉड्यूल को वापस लेने के आदेश के बावजूद अधिवक्ताओं, स्टांप वेंडरों और दस्तावेज लेखकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। आंदोलनकारियों ने सुलह के दावों को खारिज करते हुए हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
हड़ताल के चलते मंगलवार को भी तहसील सदर परिसर में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। दूर-दराज से अपनी जमीनों और संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने आए सैकड़ों लोगों को बैरंग लौटना पड़ा, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा।
आंदोलन कर रहे अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किए गए नए आदेश में उनकी कई महत्वपूर्ण मांगों को गोलमोल कर दिया गया है। जब तक हर एक बिंदु पर स्थिति साफ नहीं की जाती और उनकी चिंताओं का पूर्ण समाधान नहीं होता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
इधर, हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर देखने को मिल रहा है। तहसील सदर के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में दिनभर ताले लटके रहे या वहां सन्नाटा पसरा रहा। स्टांप वेंडरों के न बैठने से स्टांपों की बिक्री भी पूरी तरह ठप रही। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रशासन और शासन स्तर पर उनकी मांगों को स्पष्ट करते हुए संशोधन नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। मौके पर जेपी शर्मा, मनीष अग्रवाल, सुदर्शन शर्मा, शशांक पचौरी, विवेक गुप्ता आदि मौजूद रहे। संवाद