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रंज-ओ-गम के बीच सुपुर्द-ए-खाक हुए ताजिये

Sun, 01 Oct 2017 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
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मुहर्रम - फोटो : Amar Ujala
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मुहर्रम की दस तारीख को हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर में रविवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा ताजियों और अलमों के जुलूस निकाले गए। शहर के अलग-अलग इलाकों से निकले यह जुलूस घंटाघर पहुंचकर एक हो गए और यहां से एक साथ मुरसान गेट स्थित कर्बला पहुंचे। वहां रंज-ओ-गम के माहौल में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किए गए।  
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जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने मर्सिए और नौहे पढ़कर माहौल को गमजदां कर दिया। लोगों की आंखें भर आईं। इस मौके पर शिया नौजवानों ने जहां छुरियों और जंजीरों से मातम कर अपने जिस्म को लहूलुहान कर लिया। वहीं सुन्नी अकीदतमंद भी छाती पीटकर इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत का रंज मना रहे थे।

ताजिए के जुलूस के दौरान शहर में कई स्थानों पर जाम से भी लोग जूझते रहे। ताजियों के यह जुलूस किला गेट, कांशीराम टाउनशिप, लाला का नगला और कैलाश नगर इलाकों से निकाले गए। अलग-अलग रास्तों से होते हुए यह जुलूस घंटाघर पहुंचकर एक हो गए। जुलूस के साथ चल रहे अकीदतमंद इमाम हुसैन और उनके 71 जानिसारों की शहादत की याद में मर्सिए और नौहे गाकर माहौल को गमगीन बना रहे थे। नौजवान भी छाती पीटकर मातम करते हुए हुसैन की सदाएं बुलंद कर रहे थे। 
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