साल के अंतिम चंद्रग्रहण का आधी रात के बाद मोक्ष हो गया। रविवार सुबह मंदिरों के कपाट खुलते ही उनमें धुलाई की गई और मूर्तियों को स्नान कराया गया। नई पोशाक धारण कराई गई। श्रद्धालुओं ने आरती के बाद भजन-कीर्तन किया।
शनिवार-रविवार की रात्रि में लगे चंद्रग्रहण का सूतककाल शुरू होने की वजह से शनिवार की दोपहर के बाद मंदिरों के कपाट नहीं खुले थे और संध्या आरती भी नहीं हुई। रविवार सुबह ग्रहण खत्म होने के बाद तमाम मंदिरों में सफाई के बाद कपाट खोले गए और पूजा-अर्चना की गई।
शहर के नवग्रह हनुमान मंदिर, बौहरे वाली देवी मंदिर, दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर आदि में सुबह नियमित समय पर मंंगला आरती का आयोजन किया गया। भजन-कीर्तन किया गया। लोगों ने ग्रहण के उपलक्ष्य में दान-पुण्य भी किया।