दो दिन के लंबे इंतजार के बाद रविवार देर रात 12 बजे जैसे ही कृषि उत्पादन मंडी समिति खुली, किसानों की उम्मीदों पर मौसम की मार पड़ गई। मंडी खुलने से पहले ही प्रवेश के लिए किसानों की लंबी कतारें लग चुकी थीं। रात से ही आसमान में काले बादल छाए थे और ठंडी हवाएं चल रही थीं। बारिश की आशंका को लेकर किसानों और मंडी कर्मचारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। देर रात मंडी के अंदर प्रवेश मिलने पर किसानों ने राहत की सांस ली ही थी कि सुबह 7 से 9 बजे के बीच अचानक तेज बारिश शुरू हो गई।
अचानक हुई बारिश से मंडी परिसर में किसानों के बीच भगदड़ मच गई। किसान अपनी मेहनत की फसल को भीगने से बचाने के लिए तिरपाल ढकने के लिए दौड़ पड़े। जो किसान खुले फड़ पर अपना धान उतार चुके थे, उनका माल आंशिक रूप से भीग गया।
मंडी में पिछले 12 दिनों के भीतर 4.90 लाख क्विंटल धान की आवक दर्ज की जा चुकी है। शुरुआत में अच्छे धान के दाम 4450 रुपये प्रति क्विंटल तक मिले थे, लेकिन आवक बढ़ते ही रेट गिरकर 4000 रुपये तक आ गए थे। फिलहाल मंडी में धान 4100 से 4250 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि कंबाइन हार्वेस्टर से कटे धान का भाव 3700 से 3800 रुपये चल रहा है।
सोमवार सुबह पड़ी बारिश के कारण जिन किसानों की फसल भीग गई, उन्हें बाजार में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक कम दाम मिले, जिससे किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ा।
एक नजर में
सोमवार को आवक: 36 हजार क्विंटल
बढि़या धान : 4100 से 4250 रुपये प्रति क्विंटल
1 से 12 अक्तूबर तक आवक: 4.90 लाख क्विंटल
पिछले साल आवक (1 से 12 अक्तूबर): 4.50 लाख क्विंटल
प्रति बीघा पैदावार क्विंटल: 3.5 क्विंटल
पिछले साल कुल आवक: 19,06,639 क्विंटल
लोडिंग होने के बाद सभी ट्रैक्टरों को प्रवेश दिया गया। सोमवार को खरीद में किसानों को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। लोडिंग भी तुरंत करायी जा रही है, जिससे मंडी में जगह बनी रहीे।
अनिल कुमार, मंडी सचिव